मजदूर


डॉ. राजेश कुमार शर्मा"पुरोहित", शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।


 

दुनिया बदली, मजदूर भी बदले

अब उनके बच्चे भी पढ़ने लगे हैं

 

रेडीमेड जीन्स टी शर्ट पहनने लगे

मकान बनाकर सुख से  रहने लगे

 

गरीबी रेखा के नीचे वाले लाभ लेते

निशुल्क राशन पानी,  हर माह लेते

 

सरकारी अस्पतालों में जब भी जाते

निशुल्क जाँच  व उपचार करवाते हैं

 

रोजगार के लिए अपने गाँव छोड़ते

शहरों की ओर ये मजदूर चल पड़ते

 

हाड़ तौड़ मेहनत करते दिन भर ये

रात को चैन की नींद आती है  इन्हें

 

शीत ताप वर्षा को सहन कर जाते

सुबह से ही  ये कर्मवीर चल पड़ते

 

हाथो में गेंती ,तगारी ,फावड़ा लिए

श्रमिक चल पड़ते नई उम्मीद लेकर

 

अमीरों के बंगले कोठी इमारतें होती

इनका घर  शहर के नाले पर सजते

 

इनका शोषण सदियों से हो रहा है

कभी जमीदार कभी मुनीम के साथ

 

पूंजीपतियों ने इनकी कमर तोड़ दी

साहूकारों ने  जमीने गिरवी रख ली

 

इनकी पीठ पर सारी गृहस्थी रहती

चिलचिलाती धूप में कदम बढ़ते हैं

 

मजबूर नहीं है दोस्त ये मजदूर हैं

जो स्वाभिमान से जीते हैं शान से

 

जो अग्निपथ पर बढ़ते रहते सदा

पीठ न दिखाते निष्काम कर्म करते

 

कल कारखानों में दिन रात पिलते

अफसरों को सदा ही  सेल्यूट करते

 

अमीर तो त्योहार अच्छे से न मनाएं

लेकिन मजदूर नये कपडे पहनता है

 

त्योहार पर बच्चों को कपड़े दिलाता

मिठाई लाकर बाजार से खिलाता है

 

भवानीमंडी, राजस्थान