लाॅकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों के नाम प्रिंयका की कुंठित राजनीति का पर्दाफास, माया के बयान ने भी कांग्रेस की बखिया उधेड़ी 


हवलेश कुमार पटेल, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।


बसपा सुप्रीमों मायावती पर अक्सर जातिवादी व अवसरवादी राजनीति करने के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन कोविड़ 19 के विश्वव्यापी खतरे के दौरान मायावती की सकारात्मक राजनीति को दरकिनार करना भी नामुमकिन है। लाॅकडाउन के दौरान प्रवासी मजूदरों की आड़ में मायावती ने कांग्रेस के रवैये की जिस तरह से बखिया उधेड़ी है, उससे कांग्रेस की छवि नकारात्मक राजनीति करने वाली पार्टी के रूप में उभरी है। हालांकि मायावती के इस रूख से यूपी की योगी सरकार का बचाव तो हुआ है, लेकिन इसका यह मतलब कतई नहीं लगाया जाना चाहिए कि मायावती भाजपा समर्थक हो गयी हैं। बसपा के लिए कांग्रेस नागनाथ तो भाजपा सांपनाथ की तरह ही हैं।
बसपा सुप्रीमों मायावती ने अपने ट्वीट में कहा है कि ‘‘पिछले कई दिनों से प्रवासी श्रमिकों को घर भेजने के नाम पर खासकर बीजेपी व कांग्रेस द्वारा जिस प्रकार से घिनौनी राजनीति की जा रही है यह अति-दुर्भाग्यपूर्ण। कहीं ऐसा तो नहीं ये पार्टियाँ आपसी मिलीभगत से एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करके इनकी त्रास्दी पर से ध्यान बाँट रही हैं?’’



यदि ऐसा नहीं है तो बीएसपी का कहना है कि कांग्रेस को श्रमिक प्रवासियों को बसों से ही घर भेजने में मदद करने पर अड़ने की बजाए इनका टिकट लेकर ट्रेनों से ही इन्हें इनके घर भेजने में इनकी मदद करनी चाहिये तो यह ज्यादा उचित व सही होगा। मायावती ने अपने ट्वीट में यह भी कहा है कि जबकि इन्हीं सब बातों को खास ध्यान में रखकर ही बीएसपी के लोगों ने अपने सामथ्र्य के हिसाब से प्रचार व प्रसार के चक्कर में ना पड़कर, बल्कि पूरे देश में इनकी हर स्तर पर काफी मदद की है। अर्थात् बीजेपी व कांग्रेस पार्टी की तरह इनकी मदद की आड़ में कोई घिनौनी राजनीति नहीं की है।
मायावती ने अपने ट्वीट में नसीहत करते हुए कहा है कि ‘साथ ही, बीएसपी की कांग्रेस पार्टी को यह भी सलाह है कि यदि कांग्रेस को श्रमिक प्रवासियों को बसों से ही उनके घर वापसी में मदद करनी है अर्थात ट्रेनों से नहीं करनी है तो फिर इनको अपनी ये सभी बसें कांग्रेस-शासित राज्यों में श्रमिकों की मदद में लगा देनी चाहिये तो यह बेहतर होगा।’’



प्रवासी श्रमिकों की वापसी पर राजनीतिक किच-किच के दौरान बसपा सुप्रीमों  मायावती ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाडेरा पर निशाना साधते हुए कहा है कि वे यूपी में नहीं, बल्कि पंजाब और चंडीगढ़ बसे भेजें। बीएसपी सुप्रीमो ने कांग्रेस को ही सलाह दे डाली कि वह एक हजार बसें उत्तर प्रदेश भेजने की बजाय, उन्हें पंजाब और चंडीगढ़ भेज दें, ताकि पीड़ित श्रमिक सुरक्षित पहुंच सकें। इसके साथ ही मायावती ने कांग्र्रेस के दावे पर शक करते हुए कहा है कि यदि उनके पास 1000 बसें हैं तो उन्हें तत्काल लखनऊ भेज देना चाहिए, क्योंकि वहां भी मजदूर घर वापिसी का इंतजार कर रहे हैं।



दरअसल कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने इन मजदूरों को घर भेजने के लिए 1000 बसों के संचालन की यूपी सरकार से अनुमति मांगी थी। जिस पर योगी सरकार ने प्रियंका के निजि सचिव को पत्र लिखकर बसों व यात्रियों का विवरण मांगा था। खबर है कि प्रियंका गांधी की ओर से बसों का जो विवरण भेजा गया, उनमें काफी बसों के नम्बर ऐसे हैं, जो टैम्पों या एम्बूलेंस के नाम से दर्ज हैं। इसके अलावा बहुत से वाहन ऐसे हैं जिनकी फिटनेस एक्सपाॅयर है, कुछ वाहन ऐसे हैं, जिनका इन्श्योरेंस एक्सपाॅयर है और ढ़ेंरो वाहन ऐसे हैं, जिनका इन्श्योरेंस और फिटनेस दोनों ही एक्सपायर हो चुके हैं।
इसके साथ ही कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति का उस समय भी असली रूप सामने आया, जब यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय सिंह लल्लू भारी भीड़ को उकसाकर यूपी बार्डर पर ले आये। हालांकि बाद में यूपी सरकार एक्शन में आयी और अजय सिंह लल्लू व ववेक बंसल पर फतेहपुर सीकरी थाने में धारा 188, 269 के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया। इसके साथ ही प्रियंका गांधी के निजी सचिव संदीप सिंह व अजय कुमार लल्लू के खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज थाने में फर्जीवाड़ा के आरोप में एफआईआर दर्ज करायी गयी है।



बता दें कि यूपी राजस्थान बॉर्डर पर बसों को लेकर यूपी पुलिस और कांग्रेस नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी। उस समय यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार मौके पर मौजूद थे और कांग्रेस नेताओं ने योगी सरकार मुर्दाबाद के नारे लगाए थे।
मौनी बाबा के नाम से मशहूर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि कोरोना का खतरनाक शिकंजा भारत पर कसता जा रहा है। भारत अब दुनिया के सर्वाधिक प्रभावित 11 मुल्कों में शामिल हो गया है, जहाँ 1 लाख से लेकर 15 लाख मरीज है। फतेहपुर, कौशाम्बी, गोंडा, अम्बेडकरनगर जैसे पिछड़े जिलों में संक्रमण गांव-ग्रामीण तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा था कि हम घातक स्थिति की ओर जा रहे है।



प्रियंका गांधी ने यूपी की योगी सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश करते हुए अपनी अपील को मार्मिक बनाने की कोशिश करते हुए कहा था कि उप्र सरकार ने हद कर दी है। जब राजनीतिक परहेजों को परे करते हुए त्रस्त और असहाय प्रवासी भाई-बहनों को मदद करने का मौका मिला तो दुनिया भर की बाधाएँ सामने रख दी हैं। प्रियंका ने कहा था कि योगी जी! इन बसों  पर आप चाहें तो भाजपा का बैनर लगा दीजिए, अपने पोस्टर बेशक लगा दीजिए, लेकिन हमारे सेवा भाव को मत ठुकराइए, क्योंकि इस राजनीतिक खिलवाड़ में तीन दिन व्यर्थ हो चुके हैं और इन्ही तीन दिनों में हमारे देशवासी सड़कों पर चलते हुए दम तोड़ रहे हैं।



जानकारों की मानें तो प्रियंका की ओर से दिये गये बसों के नम्बर टैम्पो, एम्बूलेंस के होने सहित ढे़रों वाहनों की फिटनेस, ढ़ेरों वाहनों के इंश्योरेस और ढ़ेरों वाहनों के फिटनेस और इंश्योरेंस दोनों ही एक्सपाॅयर होने की सच्चाई ने कांग्रेस के सेवाभाव और नीयत की कलई खोलकर रख दी है। इसके साथ ही बसपा सुप्रीमों मायावती का बयान और कांग्रेस पर पलटवार न केवल यूपी के योगी सरकार का बचाव करता है, बल्कि कांग्रेस की कुंठित राजनीति को भी उजागर करता है।