एक बाबू की अंगुलियों के इशारे पर नाच रहा रजिस्ट्री कार्यालय (शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र के वर्ष 12, अंक संख्या-29, 14 फरवरी 2016 में प्रकाशित लेख का पुनः प्रकाशन)


शि.वा.ब्यूरो, खतौली। प्रदेश सरकार को राजस्व उपलब्ध कराने वाले विभागों में महती भूमिका निभाने वाला उपनिबन्धक कार्यालय विगत काफी दिनों से एक बाबू के अंगुलियों के इशारे पर चल रहा है और कार्यालय सरकार की आय का स्रोत बनने से ज्यादा उक्त बाबू की नीजि आय का स्रोत बन गया है।
ज्ञात हो कि कृषि उत्पादन मण्डी समिति परिसर स्थित उपनिबन्धक का कार्यालय एक बाबू की अंगुलियों की कटपुतली बना हुआ है। बताते चलें कि कई उपनिबन्धक बदलने के बावजद उक्त बाबूूूूूूूूूूूूूूूूू अपनी सीट पर ज्यों का त्यों का बरकरार है। यहां आने से पूर्व उक्त बाबू जानसठ उपनिबन्धक कार्यालय में लम्बे समय तक कार्यरत रह चुका है। पैसा कमाओं और ऊपर वालों को खुश रखों की तर्ज पर काम करने के चलते उसका विभाग में पूरा दबदबा बना हुआ है। जानकारों की मानें तो उक्त बाबू की सम्पत्ति की निष्पक्ष जांच करायी जाये तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा। 
अपना नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर एक विभागीय कर्मचारी ने बताया कि उक्त बाबू ने पैसा कमाने का एक नया फण्डा अपना लिया है, जिसके तहत व अपने ही लोगों के द्वारा कुछ लोगों की शिकायत कराता है और फिर शिकायतों के निपटारे के नाम पर जमकर वसूली करता है। जमीनांे के बैनामे आदि से जुडे एक दस्तावेज लेखक की मानें तो उक्त बाबू ने कुछ दस्तावेज लेखकों के साथ सांठ-गांठ कर रखी है, जिसके बल पर वह एक ओर यादव सिंह बनने की राह पर अग्रसर है। अगर निष्पक्ष जांच कराई जाये तो कई गर्दनें फंस सकती हैं।