छोटा मुँह बड़ी बात

कुंवर आरपी सिंह, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

 

न्यूयार्क शहर की सुबह, बहुमंजिला भवन में नवीं मंजिल पर स्थित एक बड़ी प्रसिद्ध कम्पनी के तमाम अधिकारी कर्मचारी लिफ्ट ख़राब होने के कारण सीढ़ियों से ऊपर चढकर ऑफिस पहुँचने के लिये प्रयासरत थे। साथ ही ये लोग आपस में अभिवादन और औपचारिक बातें, जो कम्पनी से लेकर लिफ्ट वगैरा की कर रहे थे। इनके बीच बीच में ऑफिस का प्रमुख चपरासी जब भी बोलने की कोशिश करता, अधिकारी उस डाँट देते। तुम चुप रहो, ये तुम्हारे स्तर की बाते नहीं हैं। 

आखिरकार थकते-हाँफते सब लोग नवीं मंजिल पर ऑफिस के सामने पहुँच ही गये। बडे़ अधिकारी ने प्रमुख चपरासी से जल्दी ताला खोलने का आदेश दिया। इसपर उसने कहा-आपसे बार बार मैं यही तो पूँछना चाह रहा था कि श्रीमन्त! क्या ऑफिस की चाबी ले आये हैं? क्योंकि आपने नीचे या सीढ़ियों पर मुझे चाबी सौंपी नहीं दी थी और न ही मुझे बोलने-पूँछनेे दिया।

बड़े अधिकारी को अपने कृत्य पर बडा़ अफसोस हुआ, उसने उससे सॉरी कहा और उससे चाबियाँ लाने के लिए अपने घर भेजा। जीवन में अक्सर यह गलती सभी कर बैठते हैं, जबकि अपने से छोटे और बच्चे की भी बात ध्यान से सुननी चाहिये।

 

राष्ट्रीय अध्यक्ष जय शिवा पटेल संघ