बढ़े चलो

पटेल सतीश चन्द्र"कौशिक", शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।


तू सबल आत्म में मानव है,
अतुल शक्ति अभिसिंचित है।
भर विश्वास चलो जय हित,
आगत क्षण जय निश्चित है।


बन  वीर  अभय  निर्भय ,
जीवन के पथ बढ़े चलो।


नहीं रोकता नर नाहर को,
संकल्प अटल निश्घय हो।
मिलते हैं पथ साथी अनेक,
यदि नेतृत्व सबल निर्भय हो।


करने को नव परिवर्तन ,
अग्रदूत  बन  बढ़े  चलो।


पथ के अवरोधक तोड़ आज,
नव हलचल हो अब समाज।
जागृत बन फिर एक बार,
दैन्य विवशता कर तार तार।


कहता नीलांचल का प्रसार,
मानव हो, जय पथ बढ़े चलो।