स्कूलों में कितना सुरक्षित हैं बच्चें, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग करा रहा सर्वे (शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र के वर्ष 13, अंक संख्या-22, 24 दिसम्बर 2016 में प्रकाशित लेख का पुनः प्रकाशन)


शि.वा.ब्यूरो, नई दिल्ली। बच्चे स्कूल में कितना सेफ फील करते हैं, ये जानने के लिए नैशनल कमीशन फाॅर प्रोटेक्शन आॅफ चाइल्ड राइट्स ;एनसीपीसीआरअ राष्ट्रव्यापी सर्वे करा रहा है। कमीशन इसके जरिए स्कूल में बच्चों की स्थिति और सुरक्षा की वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट तैयार करेगा। महिला और बाल विकास मंत्रालय के तहत आने वाला एनसीपीसीआर अलग-अलग राज्यों के बाल आयोग के जरिए यह स्टडी करवा रहा है, जिसके बाद नैशनल रिपोर्ट तैयार कर मंत्रालय को सौंपी जाएगी।
इस सर्वे को एनुअल स्टूडेंट रिपोर्ट आन सेफ एंड सिक्योर स्कूल एनवाॅयरमेंट इन इंडिया नाम दिया गया है। एनसीपीसीआर के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने बताया कि सर्वे टूल्स तैयार कर लिए गए हैं और सभी राज्यों को भेज दिए गए हैं। सभी राज्यों में स्टेट कमीशन फाॅर प्रोटेक्शन आफ चाइल्ड राइट्स ;एससीपीसीआरअ इस सर्वे को करवाएंगे। सर्वे के लिए 6 इंडिकेटर तय किए गए हैं, जिसके आधार पर प्रश्नावली तैयार की गई है। पहले इस प्रश्नावली को राज्य अपनी क्षेत्रीय भाषा में तैयार कर रहे हैं। सर्वे इस तरह किया जाना है, जिससे सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे इसमें शामिल हो सकें।



सभी राज्य सरकारों से कहा गया है कि सर्वे हर जिले में किए जाएं। इसमें जिले में आने वाले सभी सरकारी स्कूलों में से कम से कम 5 पर्सेंट और सभी प्राइवेट स्कूलों में से कम से कम 5 पर्सेंट स्कूलों के स्टूडेंट्स कवर हो सकें। इस तरह देश भर के करीब 80 हजार स्कूलों के करीब 8 लाख स्टूडेंट्स इस सर्वे का हिस्सा बनेंगे। इसमें इमोशनल सेफ्टी, सेक्सुअल सेफ्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर सेफ्टी, हेल्थ और डिजास्टर मैनेजमेंट के साथ ही न्यू एजुकेशन पाॅलिसी भी शामिल है। स्टूडेंट्स से सर्वे से जाना जाएगा कि स्कूल में वह इमोशनली कितना सेफ फील करते हैं। इसके साथ ही जेंडर के आधार पर कोई भेदभाव तो नहीं होता। प्रश्नावली के माध्यम से छात्रों से यह भी पूछा जाएगा कि क्या वह न्यू एजुकेशन पाॅलिसी को लेकर कुछ सुझाव देना चाहते हैं। मोदी सरकार का एचआरडी मंत्रालय न्यू एजुकेशन पाॅलिसी पर काम कर रहा है।