शिक्षा नवाचार में शिक्षक संजय वत्स ने किया अनूठा प्रयोग, टीचर्स बुक ऑफ रिकार्ड्स 2020 में शामिल

डॉ शम्भू पंवार, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

 

संजय वत्स एक ऐसे राजकीय शिक्षक है जिन्होंने अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करते हुए शिक्षा नवाचार में अनूठा प्रयोग कर शिक्षक के महत्व को प्रदर्शित किया है।राजकीय प्राथमिक विद्यालय बेडपुर के आदर्श शिक्षक संजय वत्स का नाम शिक्षा के क्षेत्र में उनकी उल्लेखनीय नवाचारी गतिविधियों के लिए टीचर्स बुक ऑफ रिकॉर्ड -2020 में शामिल किया गया है।

आधुनिक समाज में भले ही व्यापक रूप से कठपुतली के शो अब न हो रहे हों, लेकिन स्कूलों में बच्चों को कठपुतली जरूर भाने लगी है। खेल-खेल में सिखाने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए संजय वत्स स्कूली बच्चों को कठपुतली के जरिए शिक्षा दे रहे हैं। शिक्षक संजय वत्स ने टीचिंग लर्निग मैटीरियल के तहत छोटी छोटी कठपुतलियां बनाकर बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। सांस्कृतिक स्त्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी) उदयपुर द्वारा कठपुतली पर हुए ट्रेनिंग प्रोग्राम में हरिद्वार से संजय वत्स को शामिल होने का मौका मिला। 2015 से जिले में कठपुतली के जरिए शिक्षण को आगे बढ़ाया। 

संजय वत्स दास्तान पुतली के जरिये लगभग हर विषय को दर्शाने में सक्षम हैं। वत्स बच्चों में पढ़ाई के प्रति दिलचस्पी पैदा करने के अलावा नुक्कड नाटको के जरिये जन जागरूकता अभियान भी चलाते हैं। स्कूल, गांवों में कन्या भ्रूण हत्या,बालिका शिक्षा, पोलियो, साक्षरता, जल संरक्षण,स्वच्छता,विकलांगता आदि ज्वलंत विषयों को रोचक तरीके से पेश करते हैं।

शिक्षक संजय वत्स का मानना है कि बुनियादी शिक्षा मे सुधार के लिए अब प्राथमिक शिक्षक को नवाचारी शिक्षण विधाओ के प्रयोग करना प्रासंगिक हो गया है। प्राईवेट स्कूलो मे एक्टिविटी बेस शिक्षण का कांसैप्ट काफी प्रभावी साबित हुआ है, सो प्राथमिक विद्यालयो मे भी गतिविधियो पर आधारित शिक्षण होना ही चाहिये। एक ऐसा ही कांसैप्ट है, वॉल मैग्जीन, यानि दीवार पत्रिका का। दीवार पत्रिका में बच्चे बोलचाल की भाषा में मन की बात को सहज रूप से व्यक्त कर पाते हैं। ऐसा करने में उन्हें आनंद का अनुभव तो होता ही है, साथ ही मस्तिष्क का स्वाभाविक विकास भी होता है। बच्चों की भाषायी दक्षता का विकास भी होता है। बच्चे अपने चिंतन को टूटी-फूटी भाषा में दबाव मुक्त होकर व्यक्त करते हैं। इससे उनके आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। इसके अलावा वत्स ने सीसीआरटी से संबद्ध सांस्कृतिक क्लब "बाल मुस्कान"का गठन, विपनेट से संबद्ध साईंस क्लब "ऑक्सीजन"का गठन, स्वैच्छिक शिक्षको के समूह "मंथन"के जरिये देश भर के शिक्षको के साथ सरकारी शिक्षा के हितार्थ कार्य कर रहे है।

बता दें कि उत्तराखंड स्थित रुड़की के मूल निवासी संजय वत्स को जिला, राज्य, व राष्ट्रीय स्तरीय कई सम्मानों से नवाजा जा चुका  है। आसाम बुक ऑफ रिकार्डस (आसाम) व बंगाल बुक ऑफ रिकार्ड्स (प0बंगाल) के संयुक्त तत्वाधान में पब्लिश होने वाली टीचर्स बुक ऑफ रिकार्डस के संस्थापक मंजीत शर्मा ने बताया कि इस बुक में देश के शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले शिक्षको की उपलब्धियां का  शुमार होंगा। वत्स का सिद्धांत वाक्य है-

"हम सबकी है जिम्मेदारी, बेहतर हो शिक्षा सरकारी"


चिड़ावा, नई दिल्ली