कर्मरत रहने का संदेश देता है हनुमान जी का चरित्र (हनुमान जन्मोत्सव पर विशेष)


राज शर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।


पुराणों के अनुसार महावीर हनुमान जी भगवान भूतभावन शम्भू के एकादश रुद्र के रुप में वर्णित है। इनके पूजन अर्चना से भक्तों के सकल कष्टों का निवारण हो जाता है। हनुमान जी का प्राकट्य उत्सव समस्त भू-भाग में चैत्र मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है, परन्तु वर्तमान में समस्त विश्व कोरोना के घातक वायरस से जूझ रहा है, जिसके चलते मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे। वर्तमान की स्थिति को देखते हुए घर पर ही पूजा अर्चना करना कल्याणकारी होगा। इस वर्ष 8 अप्रैल 2020 को हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाएगा। घर पर ही चमेली के तेल और सिंदूर से विशेष पूजन करें। 


अनंतानंत ब्रह्मांड के एक मात्र ऐसे देव जो भक्त होकर भी सर्वपूज्य है 



हनुमान जी सृष्टि के ऐसे देव है, जो स्वयं भगवान श्रीराम जी के परम भक्त हैं और लोग रुद्रावतार हनुमान जी को सर्वाधिक पूजते हैं। इनका पूजन करने से ग्रह बाधा रोग शोक समस्त प्रकार के उपद्रव शांत हो जाते हैं। 


एक रुप अनंत को दर्शाता है


महावीर हनुमान जी एक मुखी, पंचमुखी, सप्तमुखी, एकादश मुखी और विराट स्वरूप में सहस्र मुखी को धारण करने वाले महाबलशाली महादेव के रुद्रांश है।


जगत को दिया कर्मरत रहने का संदेश


हनुमान जी ने अपनी जीवन लीला में यही दर्शाया है कि प्राणी को हमेशा कर्मरत रहना चाहिए। असम्भव कोई भी कार्य नहीं होता अगर मानव का आत्मबल मजबूत हो। यही सन्देश उनकी लीला में झलकता हैं।



संस्कृति संरक्षक, आनी (कुल्लू) हिमाचल प्रदेश