जल्द पहचान हो तो काबू आ सकती है डायबिटीज (शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र के वर्ष 13, अंक संख्या-22, 24 दिसम्बर 2016 में प्रकाशित लेख का पुनः प्रकाशन)


पूरे देश में भारत में मधुमेह के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। भारत को अब डायबिटिक कैपिटल भी कहा जाने लगा है। हाल में किए गए सर्वे के मुताबिक यह बात सामने आई है कि लगभग छह करोड़ भारतीय डायबिटीज से ग्रस्त हैं, जिनमें दस लाख बच्चे और किशोर शामिल हैं। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि 2025 तक यह संख्या सात करोड़ हो सकती है। अगर आप इस संख्या में शामिल नहीं होना चाहते, तो यह सही वक्त है अपनी जीवनशैली में बदलाव लाने का।
अक्सर लोग यह सोचते हैं कि डायबिटीज जैसी बीमारी मीठा खाने से होती है पर कारण कुछ और ही है। डाक्टरों की मानें तो जटिल जीवनशैली और स्ट्रैस इसकी मुख्य वजह है। ज्यादा मीठा खाना मोटापे को आमंत्रण देता है। इस कारण भी डायबिटीज हो सकती है। ऐसी जीवनशैली जिसमें कम शारीरिक मेहनत हो, बहुत ज्यादा मेंटल स्ट्रेस हो, नींद पूरी नहीं हो पाती हो और रिफांइड भोजन का ज्यादा उपयोग हो रहा हो, यह सब वजह बनते हैं इस बीमारी के। यह आनुवांशिक भी होते हैं। अगर आपके परिवार में किसी को यह बीमारी है, तो ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत है।



ऐसा नहीं है कि मधुमेह के मरीज नार्मल लाइफ नहीं जी सकते, पर तभी जब इस बीमारी का पता समय से चल जाए। समय पर पता लगाने के लिए अपने शरीर में बदले लक्षणों पर जरूर ध्यान देना चाहिए। हर व्यक्ति के शरीर के लक्षण अलग-अलग होते हैं। सबसे आम लक्षण है आम दिनों में पेशाब का तेजी से निकलना। जिसमें यूरीन पर कंट्रोल रखना मुश्किल हो जाता है। अचानक वजन कम होने के साथ थकान होने लगती है। आलस आने लगता है। कुछ मामलों में भूख बिल्कुल नहीं लगती या बहुत ज्यादा लगती है। अगर आपको भी ऐसी कोई परेशानी हो रही है तो अपने काम के तनाव को कारण न समझें। बल्कि जल्द ही अपने डाक्टर से संपर्क करें।



डायबिटीज को लेकर लोगों में कई गलतफहमियां हैं। जैसे एक बार दवाई शुरू होने के बाद उसे बंद नहीं कर सकते। जबकि यह बिल्कुल गलत है। अपने वजन पर नियंत्रण कर और नियमित व्यायाम से इन दवाइयों से छुटकारा पाया जा सकता है। दूसरी बात अगर आपकी मां डायबिटिक हैं तो आप भी हो सकते हैं। मगर यह पूरी तरह सच नहीं है। डायबिटीज से पीडिघ्त मरीज में सिर्फ 25 फीसद संभावना होती है कि यह बीमारी उसके बच्चों को भी हो। कई बार यह जेनेरेशन से गायब भी हो जाती है। जिससे आने वाली पीढ़ी सुरक्षित रहती है। अक्सर लोग यह मानते हैं कि इंसुलिन डायबिटीज जैसी बीमारी का इलाज है। मगर सच तो यह हैं कि यह ब्लड शुगर और ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए दिया जाता है। इंसुलिन लेते वक्त अगर कोई यह सोचता है कि वह कुछ भी खाने के लिए आजाद है, तो यह बिल्कुल गलत है। इस दौरान भी खान-पान पर नियंत्रण के साथ नियमित व्यायाम और वजन पर ध्यान रखना जरूरी होता है। आपका वजन ज्यादा हो, तो फिर और भी ध्यान देना पड़ता है।



मधुमेह मरीजों के खानपान में फैट और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा काफी कम होनी चाहिए पर फाइबर अधिक मात्रा में लें। अगर आप डायबिटिक नहीं हैं फिर भी हेल्दी रहने के लिए सही डाइट जरूरी है। शक्करकंद, मूली, आलू जैसी जड़ वाली सब्जियों के साथ-साथ आम और केला खाने से बचना चाहिए। खाने में हरी पत्तेदार सब्जियां, दाल, अंकुरित अनाज, सोया, सोया दूध और सोया पनीर बेहतर है। सेब, अमरूद, जामुन और पपीता सबसे बेहतर फल हैं। आप जिस तेल में खाना बनाएं, वह मोनो अनसैचुरेटेड फैटी एसिड और ओमेगा थ्री फैटी एसिड युक्त होना चाहिए जैसे मूंगफली का तेल, सरसों तेल, कैनोला ऑयल और ऑलिव ऑयल वगैरह। मीठा खाने का मन करे, तो कभी आप गुड़ और शहद ले सकते हैं।