बागों में बहार है 




आशुतोष, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

 





धरती पर बाग और वन

आन बान और शान,

सुन्दरता ही इसकी पहचान 

चहुँ ओर विखरे मुस्कान।

 

महकते महुआ और लाह 

उँचे लिप्टस की अंगडाई 

पर्वतो के बीच झूमे बाग मतवाली 

लुभाते पलास के फूल रंग बिरंगे 

बागो में अदभूत लगे फूलो की डाली  ।

 

लहलहाते ऊँचे-नीचे खेतों की हरियाली

जब  आती मस्त बादल घटा वाली

खूब निखारते ऊँचे पहाड़ और झरने 

देख इसकी सुन्दरता प्रकृति भी शर्माती।

 

होते मेहनत इन पर बहुत

दिन भर करने पड़ते काम

शाम होते ही देखो पत्ता भी 

मस्ती में झूमने लगता 

यही तो बागों की सुन्दरता।

 

रात होते ही दिलकश नजारा दिखता

मौसम अपना रूख बदलने लगता

चाँदनी रात में खुशगवार मौसम

दिन की थकान को भगाता 

यही तो अपना बाग मतवाला ।

 

ऊँचे-नीचे टेढ़े-मेढ़े रास्ते पर चलना, पर्वतों के बीच गुजरना

सभी को मंत्र मुग्ध कर जाता

जो बागो में जाता उसी का हो जाता 

यही तो अपना बनाता है।

 

जनकल्याण से भरा

संतोष से रहता हरा-भरा

जिधर देखो नजर आए

सुन्दर दिलकश नजारा

बाग बुलाये हमेशा दुबारा।

                           

                           पटना बिहार





 

ऐसे इरादे रखने होगें जिसमें नारी का सम्मान हो, बड़े बुर्जगो का सम्मान हो, समाज में आर्दश और समरसता का वास हो ऐसी ही भारत वर्ष हमारे पूर्वजो ने हमें सौंपी थी जिसमें पश्चिमी सभ्यता को लाकर हमलोगो ने इसे खोखला किया है जिसे सुधारना हम सबकी जिम्मेवारी है।आशा है इस फुर्सत के पलो से आपने सबक ली होंगी ताकि पुनः पुरानी तस्वीर नही उभरे लाकडाउन के बाद एक स्वच्छ और स्वस्थ मानसिकता के साथ नये सुबह  का उदय विचारों में होगा और परिवर्तन लाएगी ऐसी आशाएँ जरूर की जानी चाहिए विशेषकर देश के युवाओं से जो आने वाले समय में देश का मार्ग प्रशस्त करने वाले है उनको आगे आना होगा यह समय उनकी ही प्रतीक्षा कर रहा है ।

                                  

                                   पटना बिहार