आपकी सर्तकता ही उल्लू बनने से बचा सकती है (शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र के वर्ष 13, अंक संख्या-22, 31 दिसम्बर 2016 में प्रकाशित लेख का पुनः प्रकाशन)


सुनील वर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।


यादव परिवार का जबरदस्त नाटक अपनी साख व सत्ता के लिये चरम सीमा पर है मासूम और बेचारा के रोल मे अखिलेश है और विलेन के रूप मे मुलायम-शिवपाल यादव है। शकुनी के रोल मे रामगोपाल यादव है, तो डिपल हीरोईन का रोलबेखूबी निभा रही हैं, और जनता मूर्ख दर्शक के रूप में सबकुछ देख रही है। निर्माता-निर्देशक अमर सिंह है और सहयोगी कांग्रेस, नाटक का सुखद अंत भाजपा को यानि मोदी को जिम्मेदार बता कर फिर सब एक होकर जनता के दरबार यानि चुनाव उसे मुर्ख बनाने मे उतरेगे मुलायम सिंह की सख्त राजनीति...न सिर्फ उल्लुओं को उल्लू बनाये रखने के लिए बल्कि नए उल्लू बनाने के लिए भी चल रही है।
एक शातिर राजनीतिक प्लानिंग के तहत अखिलेश यादव को साफ सुथरा, विकासवादी और अलग दिखा कर और अलग चुनाव लड़ा कर सपा से भटकने वाले वोटों को रोकना और संभवतः कांग्रेस के साथ अखिलेश की नयी पार्टी का गठबंधन कराकर कुछ और अतिरिक्त सीटें बटोरना, जबकि शिवपाल को आगे कर समाजवादी और बनावटी धर्मनिरपेक्षता एवं मुस्लिम तुष्टिकरण और माफिया पोषण एवं संरक्षण निति के तहत मुसलमानों और भ्रष्ट छुटभैयों के वोट बटोर कर जनता को उल्लू बना कर बढ़त लेना और फिर चुनाव बाद ये सब मिलकर सरकार बनाने का अपना मकसद पूरा करेंगे।
आपकी सतर्कता ही आपको उल्लू बनने से बचा सकती है.....खबर भले ही समाजवादी पार्टी के टूटने की प्रसारित की जा रही है...ये गिरोह है, अब अगले चुनावों में फिर लोगों के वोटों पर डकैती के फिराक में हैं। एक तरफ विकासशील और साफसुथरे जवान की भूमिका में अखिलेश है और दूसरी ओर बूढ़ा खुर्राट और राजनीति का मंझा हुआ खिलाडी मुलायम सिंह और उसके खुर्राट सहयोगी अमर, आजम और अन्य हैं। लुटना जनता को है, अब ये जतना को ही तय करना है कि वो किससे लुटना पसन्द करेगी.........?



वरिष्ठ पत्रकार खतौली, (मुजफ्फरनगर) उत्तर प्रदेश