अपनेपन की पिचकारी

नीरज त्यागी,  शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

 

अपनेपन के रंगों से मन की पिचकारी भर दो।

अबके होली में तुम सबको एक रंग में भर दो।।

 

ना हिन्दू हो,ना कोई मुस्लिम,एक रंग में सबको रंग दो।

इस  होली  में  तुम  सबको  एक ही मजहब में रंग दो।।

 

एक बच्चे सा मन हो सबका,ना मन मे कोई भेदभाव हो।

इस होली में सबको सबसे गले लगाने का एक भाव हो।।

 

ना नीला,ना हरा गुलाबी प्यार भरे शब्दो का रंग बनाओ।

मिट्ठी बातों से फिर एक दूजे के गमो को अपना बनाओ।।

 

आओ इस होली पर पूरे भारत को एक रंग से भर दे।

प्रण करे हम सब ऐसा,सबका मजहब भारतवासी कर दे।।

 

ग़ाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश