ज्यादा खतरनाक नहीं मौसमी बुखार यानी वायरल फीवर, घबराएं नहीं, जागरूक हों

हवलेश कुमार पटेल, खतौली। दो ट्टतुओं केे सन्धिकाल में मौसमी बुखार यानी वायरल फीवर जोर पकड़ने लगा है, लेकिन उससे निपटने के लिए सरकारी और निजी स्तर पर चिकित्सकों ने कमर कस ली है और वे लगातार मौसमी बुखार (वायरल फीवर) से बचाव व निपटने के लिए लोगों को जागरूक तो कर ही रहे हैं, साथ ही पीड़ित के उपचार की मुकम्मल तैयारी कर चुके हैं। सरकारी व नीजि चिकित्सालयों में भी डेंगू के बचाव के पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं, इसलिए किसी भी प्रकार से घबराने की जरूरत नहीं है। 

मौसमी बुखार यानी वायरल फीवर के सम्बन्ध में एक भेटवार्ता में बालरोग चिकित्सक डाॅ.अंकुुर शर्मा ने शिक्षा वाहिनी को बताया कि वायरल फीवर से बचाव के लिए हाईजीन मैंनटेन करें यानी आसपास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए, इसके साथ इस बात का भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि आस-पास पानी एकत्रित नहीं होने पाये। उन्होंने बताया कि पूरी आस्तीन के कपड़े खुद भी पहने और बच्चों को भी पहनायें। घर में नियमित रूप से फिनाइल का पोछा लगाते रहें। बच्चों को मच्छरों के सम्पर्क में आने से बचायें। 

उन्होंने बताया कि वायरल फीवर का आभास होते ही पेरासिटामोल टेबलेट ओर लिक्विड डाइट का इस्तेमाल करें और यथाशीघ्र निकटतम चिकित्सक या सरकारी अस्पताल से सम्पर्क करें। ब्रुफेन या न्यूमिस्लाइड आदि दवाईयों के प्रयोग से बचना चाहिए। तेज बुखार होने पर स्पांजिक यानी लगभग दो लीटर ठंडा पानी लेकर उसमें पानी की पट्टी भिगोकर बच्चें का सारा शरीर पोछें।

डाॅ.अंकुुर शर्मा ने बताया कि यदि बच्चे को लगातार बुुखार आ रहा है, पेट में दर्द होना, ऊबकाई  आना, जोड़ों में दर्द होना, शरीर पर लाल-लाल निशान दिख रहे हैं, हाथ-पैर ठंडे हो रहे हैं और बच्चा निढ़ाल हो रहा है और उसमें सुस्ती के लक्षण दिख रहेे हैं तो हो सकता बच्चे को डेंगु हो। ऐसा होने पर तुरन्त निकटतम चिकित्सक से सम्पर्क करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि समय पर सही उपचार मिल जाये तो डेंगू से डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंनेे बताया कि डेंगू के अधिकतर मरीज रिकवर हो रहे हैं।

उन्होंने बताया कि हालांकि सरकारी स्तर से ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान  चलाया जा रहा है, लेकिन इस अभियान को और तेज करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि इस मुहिम में निजी चिकित्सकों को भी अपनी सहभागिता करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि डेेंगू को हराने के लिए टेस्टिंग सुविधा का अधिकतम विस्तार करना चाहिए। इसके साथ लोगों को बुखार उतारने के उपायों का प्रचार करना जरूरी है, क्योंकि तेज बुुखार को देखते ही अधिकतर लोग पैनिक हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि रोगी को ब्लिडिंग न हो रही हो और प्लेटलेट्स 20 हजार से नीचे ने आ गयी हों तो घबरानेे की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए हम घरेलु उपचार यानी गिलोय, पपीता, नारियल पानी, एनर्जी ड्रिंक्स, जूस व ओआरएस सहित किवी आदि का उपयोेग कर सकते हैं।

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