कान्हा
रेखा घनश्याम गौड़, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।
जगत के पालनहार, आ जा धरती तुझे पुकारे
दशरथ सुत कोशल्या नन्दन सुन लो जग की पुकार
दुशासन है बढ़े यहां , हर लो धरती का भार
मानव है दानव बना यहां नारी का सम्मान गया
जगत की शुचिता दूषित कर पापी वो बन गया यहां
पाप पुण्य को भूल जगत में , अपराधों के अंधियारे में
धर्म भूलाकर बना अधर्मी गहन पाप के गलियारे में
सत् मार्ग की राह भटकता, असत् मार्ग पर चलता है
जग में हाहाकार मचाता आतंकी न डरता है
धरती कांप रही पापों से , आ जाओ अब रघुनंदन
हे दुःख भंजन , जन -मन रंजन , चिर चिरंतन हे भगवन्
सर्व पाप हर जग कल्याण कर , धरती का पाप हरो भगवन्
महिमा मंडित महि पुकारे , आ जाओ अब हे भगवन्
नारी का सम्मान बचाओ , आ जाओ अब हे रघुवर 
अकुलायी धरा को शान्त करो आ जाओ अब हे भगवन् 
पाप-ताप संताप मिटाकर, व्यथित धरा को शान्त-शान्त कर
तपती धरणी को सुख प्रदान कर , हे परम पूज्य हे परमेश्वर
हे दीनबंधु , हे दया सिन्धु , हे सुख सागर , हे करूणा गार
जगत पिता हो तुम इस जग के , क्लेश मिटा दो , हे रघुनाथ
हे कालेश्वर, हे कामेश्वर, गुणातीत जय गुणागार
नाश करो अब हर पापी का हो तुम करूणा के अवतार
देर हैं अंधेर नहीं पर देर इतना क्यों करते हो
पापी का मन बढ़ता जाता इतना विलम्ब क्यों करतें हो
चिर हरण द्रौपदी का हुआ तुम चीर रूप में प्रकट हुए
नारी की लाज बचाने को तुम गुप्त रूप में प्रकट हुए
हे असुरारी, हे खलहारी अपरना की विनती सुन लो
नारी जब चिखे चिल्लाये नारी की विनती सुन लो
जगत के पालनहार आ जा धरती तुझे पुकारे
जोधपुर, राजस्थान