संगीतमय भागवत कथा में श्री कृष्ण जन्म लीला, कृष्ण बाल लीलाए, पूतना, बाकासुर, धनुकासुर, अधासुर वध ,काली देह लीला, गोवर्धन पूजा की कथा सुना

गौरव सिंघल, देवबंद। हरी समाज शशी नगर देवबन्द द्वारा आयोजित संगीतमय भागवत कथा में कथा व्यास स्वामी रविन्द्राचार्य जी महाराज ने भगवान श्री कृष्ण जन्म लीला, कृष्ण बाल लीलाए, पूतना, बाकासुर, धनुकासुर, अधासुर वध ,काली देह लीला, गोवर्धन पूजा की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान श्री कृष्ण के जन्म लेते ही चारों ओर हर्ष का वातावरण छा गया। मंगलगीत गाये जाने लगे और छप्पनभोग बनाए गये। हर कोई भगवान श्री कृष्ण की की एक झलक पाने को आतुर होने लगे परन्तु श्री कृष्ण को देखना और पाना इतना आसान नहीं है। 

कथा व्यास स्वामी रविन्द्राचार्य जी महाराज ने कहा कि कृष्ण को पाने के लिये भोगों स्वार्थ का त्याग करना होगा तथा धर्म सत्य की राह पर चलना होगा। उन्होंने कहा कि कृष्ण को पाने का प्रयास मत कीजिये, पाने का प्रयास कीजियेगा तो कभी नहीं मिलेंगे। उन्होंने कहा कि बस प्रेम कर के छोड़ दीजिए, जीवन भर साथ निभाएंगे कृष्ण। उन्होंने कहा कि कृष्ण इस सृष्टि के सबसे अच्छे मित्र हैं। राधिका हों या सुदामा, कृष्ण ने मित्रता निभाई तो ऐसी निभाई कि इतिहास बन गया। कृष्ण जी कितनी अद्भुत लीला है। राधिका के लिए कृष्ण-कन्हैया था, रुक्मिणी के लिए कन्हैया-कृष्ण थे। पत्नी होने के बाद भी रुक्मिणी को कृष्ण उतने नहीं मिले कि वे उन्हें "तुम" कह पातीं। 

उन्होंने कहा कि आप से तुम तक की इस यात्रा को पूरा कर लेना ही प्रेम का चरम पा लेना है। रुक्मिणी कभी यह यात्रा पूरी नहीं कर सकीं। राधिका की यात्रा प्रारम्भ ही तुम से हुई थीं। उन्होंने प्रारम्भ ही चरम से किया था, शायद तभी उन्हें कृष्ण नहीं मिले। कितना अजीब है न! कृष्ण जिसे नहीं मिले, युगों-युगों से आज तक उसी के हैं, और जिसे मिले उसे मिले ही नहीं। आज की कथा के यजमान श्रीमति रेखा व सरजू ने व्यास पीठ पर आरती कर महाराज श्री का आर्शीवाद प्राप्त किया। कथा में पंडित संजय शर्मा, ममता, रानी, छोटी, गूडडी, कालो, हरिराम, सुभाष, गौरव कुमार सहित हरि समाज के समस्त महिला व पुरूष श्रद्धालु उपस्थित रहे।