आँख का पानी
डॉ अ कीर्तिवर्धन, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।
होने लगा है कम, अब आँख का पानी,
छलकता नहीं है अब, आँख का पानी।
कम हो गया लिहाज, बुजुर्गों का जब से,
मरने लगा है अब, आँख का पानी।
सिमटने लगे हैं जब से, नदी ताल, सरोवर,
सूख गया है तब से, आँख का पानी।
पर पीड़ा मे बहता था, कभी दरिया तूफानी,
आता नहीं नजर कतरा, आँख का पानी।
स्वार्थों कि चर्बी, जब आँखों पर छाई,
भूल गया बहना, तब आँख का पानी।
उड़ गई नींद, माँ-बाप की आजकल,
उतरा है जब से बच्चों की, आँख का पानी।
फैशन के दौर की, सबसे बुरी खबर,
मर गया है औरत की, आँख का पानी।
देख कर नंगे जिस्म और लरजते होंठ,
पलकों मे सिमट गया, आँख का पानी।
लूटा है जिन्होंने मुल्क का, अमन औ चैन,
उतरा हुआ है जिस्म से, आँख का पानी।
नेता जो बनते आजकल, भ्रष्ट बेईमान हैं,
बनने से पहले उतारते, आँख का पानी ।
विद्या लक्ष्मी निकेतन 53 -महालक्ष्मी एन्क्लेव, मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश