.....ताकि फिर कोई बच्चा बहादुर न बनें, घर से भागे बच्चों को चाइल्ड लाइन हेल्पलाइन की मदद से आलोक ने पकड़वाया

 

शि.वा.ब्यूरो, कानपुर अमरकांत द्वारा लिखित कहानी बहादुर पढ़ने, पढ़ाने और कहानी के मर्म को आत्मसात करने वाले शिक्षक आलोक कुमार सिंह द्वारा चाइल्ड लाइन हेल्पलाइन को फोन कर घर से भागे हुए दो बालकों को पकड़वाने की कहानी भी दिलचस्प है। आलोक कुमार सिंह ने बताया कि उन्हें 28 अगस्त 2022 को ट्रेन संख्या 13413 फरक्का एक्सप्रेस द्वारा लखनऊ से अलीगढ़ जाना था, जिसके लिए रिजर्वेशन पहले से हो चुका था। अपने सीट के पास पहुंचने पर देखा कि सीट पर बगैर रिजर्वेशन दो बालक बैठे हुए हैं, उनसे सीट खाली कराकर मैं बैठ गया और वें दोनों बगल की खाली सीट पर बैठ गए। 
बच्चों को देखकर मैंने उनसे वार्तालाप शुरू की तो तभी छोटे बालक ने मेरा फोन मांगकर अपने घर बात करने का आग्रह किया और मैंने बताएं नंबर को मिलाकर फोन दे दिया, लेकिन फोन में गूगल पे और अन्य महत्वपूर्ण फाइनेंशियल एप होने के कारण जल्दी वापस ले लिया। फोन वापस लिए अभी एक मिनट ही होगा कि तभी उस डायल नंबर से मुझे फ़ोन आने शुरू हो गया। डिस्टर्बेंस न हो, इसलिए उस फोन नंबर को ब्लाक कर दिया, लेकिन अगले ही पल दुसरे नंबर से फोन आने लगा तो मुझे लगा फास्ट टैग वालों का तो नहीं, क्योंकि इधर एक दो दिन में मेरे फ़ास्ट टैग की भी डिलीवरी होनी थी, लेकिन यह नंबर भी बिहार से ही था और उन दोनों बच्चों के बारे में मुझसे जानकारी मांगी जाने लगीं। मैने उनसे पूछा आपको मेरा नंबर किसने दिया ? तब उन्होंने वहां पहले से मौजूद बच्चों की मां से बात कराई तो पता चला कि सामने बैठे दोनों बच्चें घर से भागे हुए है। 
इस सूचना को सुनते ही मुझे अमरकांत द्वारा लिखित बहादुर कहानी के पात्र बहादुर के घर से भागने, घर से भागने के बाद बहादुर के साथ घटित घटनाएं याद हो आयीं और मैं प्रो एक्टिव मोड में आ गया। इसके बाद मुझे चाइल्ड लाइन हेल्पलाइन की याद आई और मैंने झट 1098 नंबर डायल कर उन्हें सम्पूर्ण जानकारी दी और कानपुर रेलवे स्टेशन पर मैंने मदद मांगी। ज्यों ही ट्रेन कानपुर पहुंची, जीआरपीएफ के एक पुलिस अधिकारी हमारे बोगी व सीट के पास आयें, मैंने झट दोनों बालकों को पकड़कर उनके हवाले कर दिया।