बिल को मंजूरी मिलने पर भव्य जुलूस निकाला
कार्तिक कुमार परिच्छा,  सरायकेला ( झारखंड)। निजी कंपनियों में 75 प्रतिशत नौकरियां स्थानीय युवाओं के लिए आरक्षित करने व इसके लिए कोई प्रतियोगिता परीक्षा नहीं करने के समर्थन में विधायक सह मंत्री चंपाई सोरेन के गृह जिला मुख्यालय सरायकेला खरसावां  के सरायकेला में भव्य जुलूस आयोजित किया गया। ये बहालियां कंपनियों की तय न्यूनतम अहर्ता के आधार पर की जाएंगी. यह बाध्यता प्रति माह 40 हज़ार रुपये तक की नौकरियों के लिए होगी। सरायकेला खरसावां जिला में इसको लेकर आज  झारखंड मुक्ति मोर्चा की तरफ से एक भव्य जुलूस निकाला गया है । झारखंड नियुक्ति वर्ष का शुभारंभ नामक बैनर तले सैकड़ों की तादाद में  सरायकेला खरसावां जिले के युवाओं ने यह जुलुस की शक्ल में  जिला मुख्यालय बाजार में बाजे गाजे पटाखे के साथ स्थानीय लोगों को रिझाने की भरपुर कौशिश की  । इसकी सर्वाधिक आकर्षण झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरीय नेता भोला महान्ती को पुष्प माल्य अर्पित कर अन्दुरूनी  सारे भेद भाव मिटाते हुए  आदिवासी मुलवासी को मन जीतना  रहा।
बता दें कि विधानसभा में इस बिल को मंजूरी हासिल होने के बाद अब यह क़ानून उन कंपनियों पर भी लागू होगा, जो सरकार के लिए कर्मचारियों की आउटसोर्सिंग करती हैं। पूर्णतः सरकारी नियुक्तियां इसके दायरे में नहीं आएंगी, उन पर पहले से चली आ रही आरक्षण नीतियां लागू होंगी। इस विधेयक में 'निजी क्षेत्रों में स्थानीय उम्मीदवारों का नियोजन विधेयक 2021' के मुताबिक़ यह क़ानून 10 या 10 से अधिक व्यक्तियों का नियोजन करने वाली उन सभी संस्थाओं पर लागू होंगी, जिन्हें सरकार मान्यता देती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि  यह आरक्षण संबंधित ज़िले के सभी जातियों और वर्गों के लिए होगा। बिल के अनुसार अगर किसी ज़िले में रोज़गार के अवसर उपलब्ध नहीं होंगे, तो युवाओं को पड़ोस के ज़िले में भी रोज़गार मिल सकेगा। इसके लिए कंपनियों को उम्मीदवारों की प्रतीक्षा सूची भी बनानी होगी, इसमें कोताही बरतने वाली कंपनियों पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकेगा।
जानकारों के अनुसार ऐसे अनेको लोग है, जो अपनी जमीन फैक्ट्री या अधिष्ठान में अधिग्रहण के बाद बाद आज तक दर-दर ठोकरें खा रहे हैं। उस संबंध एवं सरदार पटेल के साथ हुए मार्जार एग्रीमेंट के संबंध  नियोजन पर सरायकेला की   जनमानस आकांक्षा रखती है। प्रवर समिति के सदस्य रहे माले विधायक विनोद सिंह ने बताया कि बहाली के वक्त प्राइवेट कंपनियों को उन उम्मीदवारों का विशेष ध्यान रखना होगा, जिनका परिवार किसी उद्योग के कारण विस्थापित हुआ है। प्रवर समिति के एक और सदस्य और बीजेपी विधायक रामचंद्र चंद्रवंशी ने कहा कि यह विधेयक राज्य के युवाओं के हित में है, इसलिए मैं इसके समर्थन में हूं। ज्ञात हो कि विधानसभा ने एक विधेयक को मंज़ूरी दी है, जिसमें निजी कंपनियों में 75 प्रतिशत नौकरियां स्थानीय युवाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसके लिए कोई प्रतियोगिता परीक्षा नहीं होगी और ये बहालियां कंपनियों की तय न्यूनतम अहर्ता के आधार पर की जाएंगी। यह बाध्यता प्रति माह 40 हज़ार रुपये तक की नौकरियों के लिए होगी।