जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वाधान में महिलाओं के संवैधानिक व विधिक अधिकार विषय पर विधिक साक्षरता शिविर आयोजित
शि.वा.ब्यूरो, मुज़फ्फरनगर। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से प्राप्त कलेन्डर के अनुसार जनपद न्यायाधीश व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष राजीव शर्मा के निर्देशन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से ब्लॉक ग्राम मोरना में  महिलाओं के संवैधानिक व विधिक अधिकार  विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सलोनी रस्तोगी ने महिलाओं को भारतीय सविधान में महिलाओं को प्राप्त मौलिक अधिकारों के सम्बन्ध मे विस्तार से बताया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 39-ए के तहत यदि आर्थिक अक्षमता के कारण कोई महिला अपने मुकदमेंं की पैरवी करने में असमर्थ है तो उसे निः शुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने का अधिकार है। अनुच्छेद 14 मेंं विधि के समक्ष समानता, अनुच्छेद 15 लिंग के आधार पर भेद भाव न किया जाना, अनुच्छेद 19 में बोलने का अधिकार, अनुच्छेद 23व 24 में उत्पीडन के विरूद्ध अधिकार प्राप्त है। इसके अतिरिक्त भ्रूण हत्या को रोकने के लिए मैडिकल टरमिनेशन ऑफ प्रागनेन्सी एक्ट 1971 प्रावधान करता है कि गर्भवती महिला की जानबचाने के अतिरिक्त अन्य किसी दशा में गर्भपात नही कराया जा सकता। सलोनी रस्तोगी ने बताया कि प्री नेटल डाईगनोस्टिक टैक्नीक एक्ट में प्राविधान है कि अल्ट्रासाउन्ड तथा जॉच करने वाले सभी क्लीनिंक पंजीकृत होगे। यदि डाक्टर  द्वारा गर्भवती महिला या उसके रिश्तेदारों को शब्दों या इशारे से भ्रूण के लिंग के बारे में बताया जाता है तो तीन से पॉच साल का कारावास तथा 50,000/- रूपये जुर्माना हो सकता है तथा लाईसेन्स भी रदद किया जा सकता है। संविधान के अनुच्छेद 21 में बालिकाओं को गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है, और यह अधिकार उन्हे गर्भ से ही प्राप्त हो जाता है।
सचिव ने यह भी बताया गया कि महिलाओें को संविधान के अनुच्छेद 21-ए के तहत शिक्षा का मूल अधिकार प्राप्त है। शिक्षा हमारा सब से बडा हथियार है तथा सशक्तिकरण का सब से बडा माध्यम है।  सभी बालिकाओं को खूब महनत कर पढाई करने के लिए जागरूक किया गया। उनके द्वारा महिलाओं के सम्बन्ध में उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा चलायी जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बारे में विस्तार पूर्वक बताया गया। यदि कोई महिला मुकदमें की पैरवी आर्थिक स्थिति के कारण करने में असमर्थ है तो उसे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में आवेदन देने पर निः शुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराया जायेगा। तथा शिविर में उपस्थित सभी महिलाओं को संविधान में दिये गये मौलिक कर्तव्यों व कोविड -19 करोना वायरस के बारे मे जानकारी देते हुए जागरूक किया गया।  
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ने बताया कि आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन 11 सितंबर 2021 दिन द्वितीय शनिवार, को दीवानी न्यायालय परिसर व वाहृय न्यायालय बुढाना, कलक्ट्रेट में किया जायेगा, जिसमें आपराधिक, 138 एन0 आई0 एक्ट, बैक रिकवरी, मोटर दुर्घटना प्रतिकर याचिका, टेलीफोन, बिजली एवम् पानी के बिल, वैवाहिक वाद, भूमि अधिग्रहण, राजस्व वाद, तथा सिविल वादों का निस्तारण किया जायेगा।