एसडी कालेज आॅफ इन्जिनियरिंग एण्ड टैक्नोलोजी, मुजफ्फरनगर में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित
शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर। एसडी कालेज आॅफ इन्जिनियरिंग एण्ड टैक्नोलोजी, मुजफ्फरनगर में पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं महामृत्युंजय सेवा मिशन अध्यक्ष पंडित संजीव शंकर ने केथ का पौधा लगाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होने कहा कि प्रकृति की पूजा माँ भगवती की ही पूजा है शिवपुराण के अनुसार यदि पौधों में ‘‘नमः शिवाय‘‘ मंत्र कहते हुए जल देते हैं तो रुद्राभिषेक का फल ही प्राप्त होता है। श्रावण मास में पौधारोपण का महत्व बहुत अधिक है। कार्यक्रम में संस्थान के अधिशासी निदेशक प्रो० (डॉ०) एस० एन० चैहान ने बताया कि कॉलेज परिसर में भगवान शिव को प्रिय लगभग सभी पौधे जैसे रुद्राक्ष, बेल, कनेर, धतूरा इत्यादि पहले से ही उपलब्ध हैं। डा० चैहान ने पौधारोपण कर पर्यावरण को बचाने का संकल्प लिया गया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया। डा० चैहान कहा कि पर्यावरण को बचाने के लिए उसका संरक्षण आवश्यक है। शुद्ध ऑक्सीजन पाने के लिए सभी को अधिक से अधिक पौधे लगाने होंगे। पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। वातावरण में फैल रहे इस जहर को रोकने का सबसे अच्छा उपाय यह है कि अधिक संख्या में पौधे रोपित किए जाएं। पेड़-पौधों के अंधाधुंध दोहन से यह स्थिति बनी है। अतः हम सभी का फर्ज बनता है कि पृथ्वी की खूबसूरती को बनाए रखने में अपना योगदान दें। भारत सरकार जिस प्रकार पौधारोपण अभियान चलाकर जन-जन को जगाने का काम कर रही है यह हम सभी के लिए प्रेरक है।
इस अवसर पर प्रख्यात कवि डॉ० अ० कीर्तिवर्धन ने पौधारोपण करते हुये कहा कि यह वृक्ष ही एकमात्र ऐसा साधन है जिससे प्राकृतिक रूप से हमें सुरक्षा प्रदान होती है ऑक्सीजन, छाया के साथ-साथ रेडियोएक्टिव किरणों को सोखने में पौधों का बहुत अधिक महत्व है। डॉ० कीर्तिवर्धन ने सभी से अधिक से अधिक पौधे लगाने की अपील की। संस्थान के प्राचार्य डा० ए० के० गौतम ने कहा कि हरियाली सदैव ही मन को हर्षित करती है अतः हमें बढ़चढ़ कर वृक्षारोपण करना चाहिये। पर्यावरण में स्वच्छता अति आवश्यक है। सुन्दर परिवेश से मन को प्रसन्नता मिलती है। पेड़-पौधों की कमी से निरंतर पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है। पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए पौधारोपण बहुत जरूरी है। तापमान में हो रही निरंतर वृद्धि और मानसून परिवर्तन से होने वाले दुष्प्रभाव से बचने के लिए सभी को कम से कम एक पेड़ अवश्य लगाना चाहिए। आयोजन में डा० पारेश कुमार, डा० आर० टी० एस० पंुडीर, डा० विकास कुमार, डा० योगेश कुमार शर्मा, प्रो० अभिषेक राय आदि उपस्थिति रहे।