मूंग
मूंग से हम सब बहुत अच्छी तरह परिचित हैं| मूंग की दाल द्विदल धान्य है और समस्त दलहनों में अपने विशेष गुणों के कारण अच्छी मानी जाती है| मूंग काले, हरे, पीले, सफ़ेद और लाल अनेक तरह की होती है| रोगियों के लिए मूंग बहुत श्रेष्ठ बताई जाती है| मूंग की दाल से पापड़,बड़ियां व पौष्टिक लड्डू भी बनाये जाते हैं| मूंग की दाल खाने में शीतल व पचने में हलकी होती है| विभिन्न रोगों में मूंग का उपयोग- चावल और मूंग की खिचड़ी खाने से कब्ज दूर होता है| खिचड़ी में घी डालकर खाने से कब्ज दूर होकर दस्त साफ़ आता है| मूंग को सेंककर पीस लें, इसमें पानी डालकर अच्छी तरह से मिलाकर लेप की तरह शरीर पर मालिश करें| इससे ज्यादा पसीना आना बंद हो जाता है| मूंग की छिलके वाली दाल को दो घंटे के लिए पानी में भिगो दें| इसके बाद इसे पीसकर गाढ़ा लेप दाद और खुजली युक्त स्थान पर लगाएं,लाभ होगा| टाइफाइड के रोगी को मूंग की दाल बनाकर देने से लाभ होता है, लेकिन दाल के साथ घी और मसालों का प्रयोग बिलकुल न करें| मूंग को छिलके सहित खाना चाहिए। बुखार होने पर मूंग की दाल में सूखे आंवले को डालकर पकाएं| इसे रोज़ दिन में दो बार खाने से बुखार ठीक होता है और दस्त भी साफ़ होता है|