सागर जिले के सुरखी विधान सभा चुनाव के मद्देनज़र, संघे शक्ति कलियुगे

कूर्मि कौशल किशोर आर्य, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

 

       मध्य प्रदेश के सागर जिले के सुरखी विधान सभा का चुनाव नजदीक है। ऐसे में हमें आपस में सहमति बनाकर अपने कूर्मि समाज के किसी एक ईमानदार, जूझारु, मिलनसार, कर्तव्यनिष्ठ, सभतावादी, निष्पक्ष कूर्मि मित्र को टिकट दिलाकर उन्हें जिताना चाहिए और विधान सभा भेजकर अपने कूर्मि समाज के गौरव बढा़ते हुए सुरखी विधान सभा क्षेत्र के वासियों के विकास और अधिकार के मुद्दे को आगे बढा़ना चाहिए। अगर हमारे कूर्मि समाज के सुरखी विधान सभा के कई मित्र आपस में ही टिकट लेने के लिए कुट्टम लड़ाई करेंगे तो राजनैतिक दलों के हाईकमान इसका फायदा उठाकर हमारे कूर्मि समाज के मित्र को टिकट नहीं देकर किसी दूसरी जाति के व्यक्ति को टिकट दे देंगे। हो सकता है हमारे किसी कूर्मि मित्र को टिकट मिल भी जाये, पर दूसरे कूर्मि संभावित प्रत्याशी अगर नाराज रहेंगे तो जीत नहीं हार होगी। ऐसी हालत में हमारे आपसी लड़ाई वाले गलती के कारण दूसरे को इसका लाभ मिलेगा। 

       एक कहावत है "संघे शक्ति कलियुगे " इस कलियुग में संगठन, एकता में ही ही शक्ति है जिसके सहारे हमलोग हर जंग जीत सकते हैं। एक दूसरी कहावत है "घर फुटे गंवार लूटें" मतलब जैसे ही हमारे घर-परिवार, समाज-जाति, संगठन में आपस में फूट-लड़ाई होंगे इसका फायदा दूसरे लोग उठाएंगे, इसीलिए आप सभी स्वजाति मित्रों से साग्रह निवेदन है कि आप सुरखी विधान सभा के चुनाव में कूर्मि समाज के किसी एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ मित्र को टिकट दिलाकर उन्हें जीताने की पूरी कोशिश करें।

        हम जानते हैं सुरखी विधान सभा का चुनाव लड़ने के लिए कूर्मि समाज के 3 कूर्मि मित्र कोशिश कर रहे और टिकट लेने की कोशिश भी कर रहे हैं। पर हमें यह चुनाव जीतने के लिए 3 कूर्मि प्रत्याशी की जगह एक कूर्मि प्रत्याशी ही रखना होगा और बाकी दो संभावित कूर्मि प्रत्याशी को अपना नाम वापस लेना होगा और किसी एक कूर्मि मित्र को ही टिकट दिलाने के लिए सभी संभावित कूर्मि प्रत्याशियों और सुरखी विधान सभा के कूर्मि समाज के मित्रों को पुरजोर कोशिश करनी होगी। 

        ध्यान रहे कूर्मि समाज के आपस के लड़ाई में कोई और इसका फायदा नहीं ले पाये, इसीलिए सुरखी विधान सभा और सागर जिले के कूर्मि समाज के मित्रों समय रहते आप जागरूक हो जाईए और समझदारी से काम लीजिए, नहीं तो बाद में "अब पछताये होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गई खेत " जैसी हालत हो जाएगी। वैसे तो यह नीति देश के सभी राज्यों के सभी तरह के चुनाव में कारगर, उपयोगी और सफलतम सिद्ध हो सकते हैं वशर्ते इसका ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा पूर्वक हमारे कूर्मि समाज के जागरूक, जिम्मेदार और बुद्धिमान मित्र पालन या धारण करेंगे। फिलहाल यह नीति सुरखी विधान सभा के चुनाव में आजमाकर एक नव निर्माण की शुरुआत कीजिए।

 

राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा