जनविरोधी और देश विरोधी है केन्द्र की मोदी सरकार

कूर्मि कौशल किशोर आर्य, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

 

              भाजपा के नेताओं को असाध्य मानसिक बीमारी लग चुकी है, इसका एक मात्र स्थाई इलाज सत्ता से इनकी हमेशा के लिए विदाई है। इनके नेता और कार्यकर्ता इतने अंधभक्त और कृतज्ञ अपने स्वामी के बन चुके हैं कि वे हमारे भारत के स्वराज के जनक व समानता के अधिकार को अपने शासन में कड़ाई से लागू और आगे बढा़ने वाले छत्रपति छत्रपति शिवाजी महाराज की शक्ल सूरत की नकल करके नरेंद्र मोदी जी के फोटो के साथ जोड़कर मोदी जी की छत्रपति शिवाजी से तुलना करते हैं तो कभी हमारे राष्ट्र निर्माता,भारत रत्न और भारत के बिस्मार्क के नाम से प्रसिद्ध और भारत के प्रथम गृहमंत्री सह उप प्रधानमंत्री लौहपुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल की तुलना भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह वर्तमान गृहमंत्री अमित शाह से करके हमारे भारत के महान विभूति और क्रांतिकारी बदलाव चाहने और लाने वाले नायकों को अपमानित करने की कोशिश करते हैं। यह बिल्कुल ही दुःखद और शर्मनाक कुकृत्य है, जिसकी जितनी भी भर्त्सना की जाए वह कम है। हम भाजपा के आईटी सेल और अन्य सभी अंधभक्त नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों से निवेदन करते हैं कि कृपया वे इस तरह के कुकृत्य करने से बचकर रहें, क्योंकि इसका खामियाजा आपको आने वाले चुनाव में निश्चित रूप से भुगतना पड़ेगा। जब देश की जनता कांग्रेस के अहंकार को तोड़ सकती है तो भाजपा के अहंकार को भी तोड़ सकती है। पहले 2014 के चुनाव में देश की जनता ने कांग्रेस के गलत नीतियों से परेशान होकर और कोई तीसरे मोर्चा रूपी विकल्प नहीं बनने के कारण भाजपा और नरेन्द्र मोदी के दिखाये गये सपने के झाँसे में आकर पूर्ण बहुमत से केन्द्र में सरकार बनाने का मौका दे दिया, पर 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के नेताओं ने भी वही चालबाजी करके चुनाव जीतने की कोशिश की, जिसमें में सफल भी हुए वह चालबाजी थे, पुलबामा के आतंकी हमले की ब्रांडिंग, जिसमें भारत की मीडिया ने भाजपा को पूरा समर्थन और सहयोग किया। कुछ बची खुची कसर ईवीएम सेटिंग ने पूरी कर दी। 

             आपको पता तो है ही कि 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले भाजपा छतीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान के विधान सभा चुनाव बुरी तरह से हार कर होकर सत्ता से बाहर हो गई। इन तीनों राज्यों में जनता ने कांग्रेस को बहुमत दिया और कांग्रेस की सरकार भी बनी। कर्नाटक में भी कांग्रेस और जनता दल सेक्यूलर को जनता ने बहुमत दी, पर कर्नाटक में पूर्व भाजपा नेता और तत्कालीन राज्यपाल ने जबरन भाजपा नेता येदुयप्पा को मुख्यमंत्री की शपत दिला दी। भाजपा ने वहाँ सरकार बरकरार रखने और बहुमत साबित करने के लिए कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों को तोड़ने की पूरी कोशिश की, पर वह सफल नहीं हो पाई। वैसी स्थिति में येदुयप्पा ने इस्तीफा दिया और तब कुमार स्वामी जी के नेतृत्व में जेडीएस और कांग्रेस की सरकार बनाई गई, पर भाजपा की निगाह ऐन-केन-प्रकारेन कर्नाटक की सत्ता पर कब्जा करना था, जो उसने करीब 7-8 महीने के अंदर ही जेडीएस और कांग्रेस के करीब 20 विधायक को तोड़कर मुंबई के बीकेसी के होटल में कैद कर दिया। इस खेले गये खेल को देश विदेश ने लोगो ने देखा और समझा। और वह भी घड़ी आ गई जब सच पराजित हुआ और भाजपा कर्नाटक में जेडीएस और कांग्रेस के तोड़े गये विधायक के समर्थन से सत्ता पर कब्जा कर ही लिया। उसके पहले भाजपा ने मणिपुर, गोवा में वही खेल खेलकर सत्ता में आ गई। इतना ही नहीं भाजपा ने इस लाॅकडाउन के समय में मध्य प्रदेश के पूर्ण बहुमत की कांग्रेस की कमलनाथ सरकार को भी गिराने के लिए वर्षों से कांग्रेसी रहें ग्वालियर के महाराजा परिवार के माधवराव सिंधिया के बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया के सहयोग से करीब 22 विधायक को तोड़कर मध्य प्रदेश की सत्ता पर कब्जा कर लिया। भाजपा यहीं नहीं रुकी वह राजस्थान की कांग्रेस की अशोक गहलोत की सरकार की भी गिराकर खुद सरकार बनाने की कोशिश की, पर वहाँ वह फिलहाल सफल नहीं हो पाई। पर राजस्थान की सत्ता पर कैसे भी कब्जा करने की कोशिश में भाजपा जरूर लगी हुई है। हम जानते हैं भाजपा ने 2014 में देश की जनता से जो भी वादें किये, जो भी सपने दिखाये  उसका 5% भी इसने पूरा नहीं किया है-

स्विस बैंक से कालाधन वापस लाया नहीं गया ।

हर नागरिक के बैंक खाते में 15 लाख रुपये नहीं आये

हर साल 2 करोड़ रोजगार नहीं दिये गये। 

एक सिर के बदले 10 सिर बाॅर्डर से नहीं लाये गये। 

देश के किसानों की आय दुगुना नहीं हुए। 

गंगा अभी भी साफ नही हुई। 

स्मार्त 100 सिटी का पता नहीं कहाँ गायब हो गई ?

भाजपा सांसद द्वारा गोद लिए गये गाँव का क्या हुआ ?

बिहार के 125 करोड़ विशेष पैकेज और विशेष राज्य के दर्जे का क्या हुआ पता नहीं? 

बेटी बचाओ बेटी पढाओं के अभियान को भाजपा के नेता ही महिलाओं को बलात्कार का शिकार बनाकर शर्मसार कर दिया है। 

पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस समेत अन्य बढ़ती महंगाई पर कोई कमी या नियंत्रण नहीं हुआ। 

रोजगार के नये स्रोत तो बने नहीं पुराने नौकरियाँ भी समाप्त कर दिये गये। 

सभी सरकारी कंपनियों और उपक्रम को बेचकर सरकार निजीकरण करके आरक्षण को समाप्त करने की साजिश कर रही है। 

बिना परीक्षा के हायर लेवल के सचिव की डायरेक्ट भर्ती करके सरकार हर जगह अपने लोगों को बैठा रही है।देश के संवैधानिक उपक्रम आर बी आई, चुनाव आयोग, सीबीआई, योजना आयोग (वर्तमान नीति आयोग), सुप्रीम कोर्ट जैसे विभाव को अतिक्रमण का शिकार बनाकर उन्हें पंगु बना दिया है। 

अपने मेहुल चौकसी भाई,निरव मोदी, विजय माल्या जैसे बैंक डिफोल्टर को भाजपा देश से बाहर भगा चुकी है और उन्हें वापस लाने में अभी तक कामयाब नहीं हुई है। 

इसके अलावा और जितने भी योजनाएं लाये गये उन सभी का कागज पर ही चलना जारी है धरातल पर दिखाई नहीं दे रही है। 

सरकारी नौकरियों से जबरन रिटायर किये जा रहे हैं। 

नये सरकारी नौकरी के सभी दरवाजे बंद किये जा रहे हैं। 

वर्षों से पेडिंग मंडल आयोग की सिफारिश पूरी तरह लागू नहीं की गई पर चार दिनों के अंदर बिना किसी आयोग गठन और सिफारिश के हर तरह से सबल और सम्पन्न चारों आधार स्तम्भ पर अधिकार करने वाले सवर्ण जाति को आनन फानन में 10% आरक्षण लागू कर दिए गए। क्यों? 

सालाना 8 लाख रुपये आय पर सवर्ण जाति को आयकर में छूट और पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज को सलाना 5 लाख रुपये तक में ही छूट यह दोहरी नीति क्यों? 

वर्षों से राजस्थान, हरियाणा में गुर्जर, पंजाब में जाट, गुजरात में पाटीदार, महाराष्ट्र में मराठा समेत अन्य विभिन्न राज्यों के पिछडे़, दलित और अल्पसंख्यक समाज के लोग आबादी के अनुसार आरक्षण देने की मांग कर रहे हैं पर उन्हें कोई आरक्षण नहीं दिये गये। क्यों? 

          इसके अलावा भी बहुत से आवश्यक मुद्दे हैं, जिन पर विचार करना हमारी भाजपा सरकार की जवाबदेही बनती है, पर जब कोरोना काल में मार्च से मई तक जब हमारे देश की जनता और मजदूर परेशान थे तो हमारे गृहमंत्री अमित शाह का कोई पता ठिकाना नहीं था, पर जैसे ही बिहार चुनाव की बात चुनाव आयोग ने की वैसे ही अपने माँद से गृहमंत्री निकलकर करोना काल में बिहार जाते हैं। वर्चुयल मीटिंग करके करोड़ों रुपये बर्बाद करते हैं। कुल मिलाकर हमारे देश की स्थिति बहुत खराब सरकार के गलत नीतियों के कारण पहले ही ही थी रही सही कसर कोरोना ने पुरी कर दी। इस कोरोना को रोकने में भी भाजपा सरकार फेल हो चुकी है। जब जनवरी 2020 के पहले और दूसरे सप्ताह में केरल में चीन से वापस आये विद्यार्थी में कोरोना के लक्षण पाये गए थे, तभी सरकार अगर एअरपोर्ट को सील कर देती या कोरोना जाँच के कड़े पहरा सभी एअरपोर्ट पर कर देती तो देश की हालत इतनी खराब शायद नहीं होती। 3 महीने के बाद मार्च में सरकार की नींद तब खुली, जब कोरोना भारत में पैर फैला चुका था। जाँच और इलाज के नाम पर सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में धन की लूट खसोट के साथ ही भर्ती मरीजों के किडनी तक निकाल लिये गये। यह है हमारी सरकार की व्यवस्था। जब देश में 112 मरीज कोरोना के थे तो देश में पूर्ण लाॅकडाउन था और अब तो 48 लाख का आंकड़ा पार कर चुका है। आज देश अनलाॅक है पर सभी लोकल, मैट्रो, पैसेंजर रेल और बस सेवाएं अभी भी बंद है। अब लोग अपने कार्यालय या दुकान पर जायें तो जायें कैसे ? देश की जनता मार्च से लेकर अब तक परेशानी से गुजर रही है और ना जाने कब तक यह परेशानी झेलनी पडे़गी पर भाजपा की केन्द्र सरकार की इस पर कोई ध्यान नहीं है। इतना ही नहीं कभी गुणवत्ता को दुरूस्त करने के लिए प्राइवेट से सरकारी किये गये विभाग, उपक्रम को आज अपने पसंदीदा पूंजीपति से बेचकर निजीकरण किये जा रहे हैं। 

          कुल मिलाकर यह केन्द्र की मोदी सरकार हमारे देश की जनता और देश के लिए अभिशाप बन चुकी है जिसका जल्दी जाना बहुत आवश्यक है। इसलिए आईए  हम देश के 85% पिछडे़,दलित और अल्पसंख्यक समाज के लोग इस जनविरोधी और देश विरोधी मोदी सरकार को सत्ता से उखाड़ कर उन्हें सही जगह भेजकर अपनी सरकार बनाये। इस मुहिम की शुरुआत आज से अभी से कर दीजिए-

जय भारत जय संविधान। 

जय संत कबीर जय संत तुकाराम। 

जय संत रहीम जय संत रविदास। 

जय गौतम बुद्ध जय ज्योतिबा फूले। 

जय सावित्री बाई फूले जय छत्रपति राजर्षि शाहूजी महाराज। 

जय संत रामास्वामी पेरियार जय संत गाडसे। 

जय चन्द्र गुप्त मौर्य जय सम्राट अशोक।

जय रामस्वरुप वर्मा जय शहीद जगदेव प्रसाद। 

जय सरदार भगत सिंह जय खुदीराम बोस। 

जय प्रफुल्ल चन्द चाकी जय बटुकेश्वर दत्त। 

जय अश्फाक उल्ला खां जय रामप्रसाद बिस्मिल। 

जय चन्द्र शेखर आजाद जय सुखदेव।

जय राजगुरू जय सातों भाई, भाई परमानंद। 

जय सरदार वल्लभ भाई पटेल जय डाॅ आंबेडकर। 

जय लल्लई यादव जय वीरचन्द्र पटेल। 

जय रामफल महतो जय फणीश्वर रेणु। 

जय जुब्बा सहनी जय विरसा मुंडा। 

जय जयप्रकाश नारायण जय लोहिया। 

जय कर्पूरी ठाकुर जय 

जय दशरथ माँझी जय लेखक मुंशी प्रेमचन्द। 

 

संस्थापक राष्ट्रीय समता महासंघ व राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा