राखी


दिलीप भाटिया, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।


एक महिला के पति के ऑपरेशन के लिए किया था रक्तदान। वह बहन हर वर्ष भेजती है मेरी कलाई के लिए राखी। निर्धन परिवार की लड़की के विवाह में की थी आर्थिक सहायता। वह नई बेटी हमेशा भेजती है मुझे राखी का धागा। मेधावी छात्रा की उच्च शिक्षा के लिए भरी थी कॉलेज की फीस। वह बेटी बन कर जाती है मस्तक पर तिलक एवम् कलाई पर सजा देती है मंगल राखी। काम वाली बाई की बेटी को हर रविवार को पढ़ाता था अंगेजी एवम् गणित। बहन की भूमिका निभा कर बांध देती है, स्नेह प्यार की राखी। गांव के स्कूल में पोषाहार बनाने वाली सेविकाओं को नवरात्रि पर दी थी साड़ी। घर आकर बांध जाती हैं मुझे शगुन की राखी। चारभुजा नाथ मंदिर की सेविका को अपने जन्म दिन पर दी थी साड़ी। वह दीदी का रिश्ता मानकर बांधती हैं नियम से राखी। इन निर्मल निस्वार्थ पवित्र भोले सरल रिश्तों को क्या दूं नाम। भीगी पलकों से स्वीकार करता हूं जिनका प्यार जो भर जाती हैं अपनी राखी से मेरी कलाई।                                         


सेवानिवृत्त परमाणु वैज्ञानिक रावतभाटा राजस्थान