दोषपूर्ण शिक्षा और अहंकार है सारी समस्याओं की जड़

प्रभाकर सिंह, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।
 


       हमारे वोट देकर सरकार बनाने वाले 85% पिछड़े,दलित और अल्पसंख्यक समाज की यह बिडंबना ही है जो निरक्षर तो निरक्षर उच्च शिक्षित लोग भी संगठन की महत्ता और हमारे धूर्त ब्राह्मणवादी,सामन्तवादी,पक्षपातीबेईमानव गद्दार नेताओं की कलुषित और निजी स्वार्थ पुरा करने वाले साजिश को नहीं समझ रहे हैं। आज उच्च शिक्षा तो लोग प्राप्त करके उच्च पदों पर जा रहें और धन कमा रहे हैं पर बौद्धिक,वैचारिक,मानसिक रूप से समझदार नहीं बन पा रहे हैं। अब भला ऐसी उच्च शिक्षा का क्या मतलब है कि लोग अपने, अपने परिवार,समाज और देश के विकास के लिए सही और गलत में फर्क महसूस करना ही भूल जाये। इस बे सिर पैर वाले महत्वहीन,नैतिकताहीन शिक्षा का दुष्परिणाम भी सामने है :- आज हर घर -परिवार से लेकर समाज, संगठन, राजनैतिक दल समेत अन्य सभी जगह अहम टकराता है।हर कोई हीन भावना से ग्रसित होकर अहंकार में खुद को ही सर्वश्रेष्ठ साबित करना चाहता है। आज कोई भी व्यक्ति यह मानने के लिए तैयार नहीं कि वह कम है। हर कोई खुद को ज्यादा जागरूक ज्यादा ज्ञानवान,ज्यादा समझदार,ज्यादा बुद्धिमान बताते तो हैं पर वास्तविक में वे ऐसा नहीं रहते हैं। इसका भी कारण आधे -अधूरे परीक्षा पास व सिर्फ धन कमाने के लिए प्राप्त शिक्षा है। आज कोई भी शख्स बुद्धिमान, ज्ञानवान बनने के लिए शिक्षा नहीं प्राप्त कर रहे हैं आज हर व्यक्ति असफर,नेता ,व्यापारी बनकर धन कमाने के लिए परीक्षा पास करने वाले पढ़ाई कर रहे हैं जिसके कारण आज का व्यक्ति धन कमाने वाले रोबोट मशीन बन चुके हैं जिसके अंदर संवेदना, भावना,संवेदनशीलता,नैतिकता,संस्कार,समर्पण,त्याग,ईमानदारी,कर्तव्यनिष्ठा का लोप हो चुका है और उसके जगह लालच, बेईमानी,जलनशीलता,बदला ने घर बना लिया है। दर असल सारे फसाद की जड़ दोषपूर्ण शिक्षा और अहंकार है। इसे समाप्त करने के लिए बौद्धिक,वैचारिक, मानसिक शिक्षा की,ज्ञान की आवश्यकता है जो आज किसी घर परिवार, स्कूल, कालेज में नहीं दी जा रही है। दर असल भारत से संयुक्त परिवार व्यवस्था के टूटने के कारण भी यही धन कमाने वाले नैतिकता हीन शिक्षा ही है आजकल हम आप अपने बच्चों को अत्याधुनिक तकनीकी उच्च देकर धन कमाने के लिए डॉक्टर, इंजीनियर,जज,डीएम,एसपी, अफसर,व्यावसायी,नेता बना रहें हैं पर इस नैतिकताहीन अव्यवहारिक उच्च शिक्षा ने हमारे युवा वर्ग को अपने माता-पिता और परिजनों से दूर कर दिया है। रही सही कसर विवाह के बाद नव वधू पूरी कर देती है। 

          आज लगभग हर घर की सच्चाई यही है चाहे ऊंची कुल की बात हो या साधारण कुल। बडे़ शहर की बात हो, गाँव या देहात हो । इसमें कुछ लोग बहुत भाग्यशाली ही हैं जिनकी संतान उच्च तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के बाद अफसर या सफल व्यवसायी बनने के बाद भी उनसे(अपने माता -पिता व परिजनों से) दूरी नहीं बना पाते हैं। अब विचारणीय बात यही है कि भला जो व्यक्ति अपने जन्म देकर पाल-पोसकर, उच्च शिक्षा दिलाकर सफल अफसर या व्यवसायी बनाने वाले माता -पिता,भाई-बहन व परिजनों के नहीं हुए तो ऐसे लोग हमारे समाज और देश के विकास में अपना क्या सकारात्मक योगदान देंगे? दर असल ऐसे लोगों से उम्मीद रखना पत्थर पर सिर फोड़ने के समान है। यही कारण है कि सभी जगह त्राहीमाम मचा हुआ है। हर व्यक्ति अपनी मनमानी अपने अहंकार में आकर कर रहा है। घर परिवार ,समाज, संगठन,भारत समेत पूरी दुनियां में जो अशांति की स्थितियाँ बन रही है उसका भी कारण लोगो के बौद्धिक,वैचारिक,मानसिक रूप से जागरूक और समझदार नहीं होना ही है। एक देश दूसरे कमजोर या मजबूत देश से टकराने की कोशिश करता है,उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं इसका भी कारण यही है। जिस दिन मानव यह समझ जाएगा कि :- रोजगार,शिक्षा,चिकित्सा,सुरक्षा समेत अन्य जीवन यापन करने के लिए आवश्यक साधन सभी मानव और अन्य प्राणियों की जरूरत है उसी दिन घर -परिवार, समाज, देश समेत पूरी दुनियां, पूरे ब्रह्माण्ड में दसों दिशाओं में शांति ही शांति,भाईचारा,परस्पर आपस में सहयोग होगें और तब हर कोई खुशहाल जीवन जी रहा होगा। 

           आज इस आधुनिक भौतिकवादी आर्थिक युग में हर कोई अपना या दूसरे के स्टेटस धन को देखकर आंकते हैं ज्ञान, बुद्धि,विवेक आज धन के बनिस्बत सेकेनड्री बना दिये गये हैं,इसे गुजरे जमाने की चीज बना दी गई है। सबकुछ सिर्फ धन को समझकर अपने निजी स्वार्थ को पूरा करने के लिए चाटुकारिता,चमचागिरी करके, स्वाभिमान गिरवी रख के जमीर तक बेच देने के कारण भी यही है। आज हर कोई अपना निजी स्वार्थ को पूरा करने के लिए जमीर बेचने के लिए कम्पटीशन में खड़ा है कि उसे कब मौका मिले कि वह भी जमीर बेचकर अपना स्वार्थ सिद्ध कर ले। 

        हमारे देश भारत में जितने समाज सुधारक,धर्म सुधारक हुए उतने शायद हु किसी देश में हुए हों पर इसका लाभ हमारे आपके घर -परिवार, समाज और देश को कितना मिला? हमलोग अपने गौतम बुद्ध,स्वामी महावीर, संत कबीर, संत रहीम,संत तुकाराम,राजमाता जीजाबाई, छत्रपति शिवाजी, छत्रपति शाहूजी,संत रविदास, संत गाडसे,संत रामा स्वामी पेरियार,ज्योतिबा फूले, सावित्री बाई फूले,राजराम मोहन राय, स्वामी दयानंद सरस्वती,रामकृष्ण परमहंस,स्वामी विवेकानंद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, डाॅ भीमराव आंबेडकर,माता रमाबाई,रामस्वरूप वर्मा, लल्लई यादव,शहीद जगदेव प्रसाद और आज उनके अनगिनत अनुयायियों क्रांतिकारी साथियों द्वारा हमारे समाज के लोगों को जागरूक करके उन्हें विकास और अधिकार की बात समझा रहे हैं,एक अच्छा इंसान बनने के साथ अपने विकास और अधिकार के लिए बातें कर रहे,मार्गदर्शन के लिए संदेश दे रहें हैं पर हमारे लोगों को उनकी बातें समझ में नहीं आ रही है। इसका लाभ जो धूर्त किस्म के लोग सवर्ण जाति के हैं वे उठा रहे हैं और अगर हमारे पिछड़े,दलित और अल्पसंख्यक समाज के 85% शोषित,पीड़ित लोग नहीं सुधरें तो भविष्य में भी उठाते रहेंगे जिसकी शुरूआत संविधान संशोधन,पिछड़े,दलित और अल्पसंख्यक समाज के आरक्षण कटौती तथा हर तरह से सबल और सम्पन्न सवर्ण जाति को  आनन-फानन में बिना किसी आयोग गठन और सिफारिश के 10% आरक्षण लागू करके की जा चुकी है। अपने निजी स्वार्थ को पूरा करने के लिए हमारे पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के नेता,जनप्रतिनिधी और आम से खास लोग भी हमारे गर्दन काटने वाली मोदी सरकार को अंधभक्ती में आँख बंद करके बिना इसके दुष्परिणाम पर विचार किये समर्थन कर रहे हैं। यह हमारे नेताओं की कैसी मानसिकता कैसे ज्ञान विवेक है इस पर प्रश्न चिन्ह लग जाता है !? पर हम देश की जनता तो जातिवाद से घिरे हुए हैं ऐसे में अपने उन बेईमान और गद्दार किस्म के नेताओं के विरोध तो करेंगे नहीं और जब तक उन बेईमान और गद्दार किस्म के नेताओं का हमलोग विरोध नहीं करेंगे तब वे ऐसी ऊटपटांग हरक्कतें दुस्साहस करके अपने निजी स्वार्थ को पूरा करने के लिए ब्रह्मण जाति को अपने पाले में करने के लिए मायावती और अखिलेश यादव जैसे नासमझ नेता परशुराम की 108 फुट मूर्ति लगाने के आश्वासन देकर हमें नुकसान पहुंचाते रहेंगे। ऐसे गैरजिम्मेदार नेताओं का बहिष्कार किया जाना चाहिए। मोदी सरकार द्वारा सवर्ण जाति को आनन फानन में बिना किसी आयोग गठन और सिफारिश के दिये गये 10 % आरक्षण का समर्थन करने वाले सभी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के नेताओं,जनप्रतिनिधियों का बहिष्कार किया जाना चाहिए। 

         मोदी सरकार ने यह कैसी व्यवस्था बनाई है कि सवर्ण जाति को सलाना 8 लाख रुपये आय पर टैक्स में छूट वही पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के लोगों को सालाना 5 लाख रुपये तक आय में ही टैक्स में छूट आखिर ऐसी असमानता क्यों? किसलिए? जबकि हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी खुद को चाय बेचने वाले पिछड़ा वर्ग के बेटा प्रचारित करते हैं। पर एक भी काम पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के विकास और अधिकार के लिए नहीं किये हैं जबकि हमारी आबादी कुल आबादी की 85% है और हमारे ही वोट से हर 5 वर्ष भारत में सरकार बनती है। मोदी जी इतने गरीब और फकीर हैं कि सूट 10-10 लाख रुपये की पहनते हैं, इतना ही नहीं सूट दिन में कई बार बदलना और अलग अलग परंपरागत कपड़े बदलकर अपने तरीके से फकीरी अंदाज लोगों को दिखाना इनकी आदत है, हॉबी है। भारतीय इतिहास में ऐसे सफेद झूठ बोलने वाले और जुमलेबाज प्रधानमंत्री पहली कभी नहीं हुए। भारत की जनता को यह पहली बार मौका मिला है कि मोदी जी जैसे झूठ पर झूठ बोलकर सम्मोहित करने वाले प्रधानमंत्री की मन की बातें सुनते हैं और उनकी भक्ती, गुणगान में मस्त हो जाते हैं तब तक सर्ट, पैन्ट,बनियान उतार ली जाती है। अब बची है सिर्फ चड्डी (जांघिया,निक्कर) जो आने वाले 2024 तक मोदी सरकार उतार ही लेगी। फिलहाल तो करीब 23 सरकारी उपक्रम को बेचा जा चुका है उसका आनंद मोदी भक्त लोग उठातें रहें। अब दूसरे सेमेस्टर में किन सरकारी उपक्रम को बेचने की तैयारी है उसका इंतजार कीजिए। सुना है राष्ट्रीय राज मार्ग को भी बेचने की तैयारी शुरू कर दी गई है। मोदी भक्त चाहें तो इसका आनंद एडवान्स में उठा सकते हैं। एक फकीर चाय बेचने वाले गरीब पिछड़े वर्ग के प्रधानमंत्री के सूट की कीमत तो आपको पता हुआ ही बाकी इनके चश्मे और जूते की कीमत तो आपको पता ही है। काश! ऐसा प्रधानमंत्री जैसा फकीर देश के हर नागरिक हो जाता तो कितना अच्छा होता!? हमें किसी अब तक के सबसे ज्यादा खुद को समझदार जानकार समझने वाले प्रधानमंत्री की मन की बात सुनने की जरूरत नहीं होती। दर असल यह मन की बात नहीं यह सम्मोहन विद्या है जिस मन की बात के सहारे मोदी जी देश की जनता को अपने भावनात्मक हृदयस्पर्शी बात,भाषण से सम्मोहित करते रहते हैं। जिसका फायदा उन्हें लगातार मिल रहा है। यह झूठा राष्ट्र वाद और मन की बात ही है जिसके सहारे मोदी जी 2019 के लोकसभा चुनाव जीते हैं नहीं तो इनका प्रधानमंत्री पद का जाना तय था। इसका संकेत छतीसगढ़,मध्य प्रदेश, राजस्थान के विधान सभा चुनाव ने दे दिये थे। दर असल मोदी जी को इसका भान हो चुका था इसीलिए फूलबामा और पाकिस्तान के साथ सर्जिकल स्ट्राइक कांड मुद्दे को हवा देकर भारत में राष्ट्र वाद का माहौल बनाकर अपने सारे नकारे कार्य पर पर्दा डालकर लोकसभा चुनाव जित लिया और फिर से 5 वर्ष के लिए प्रधानमंत्री की कुर्सी सुरक्षित कर लिया। इतना ही नहीं राष्ट्र वाद की आर में इस पिछड़े वर्ग के प्रधानमंत्री जी ने सवर्ण जाति के लोगों को लोकसभा चुनाव में ज्यादातर उम्मीदवार बनाया और उन्हें जिताकर लोकसभा भेजा ताकि पिछड़े,दलित और अल्पसंख्यक समाज के गले को आरक्षण समाप्त करके काटा जा सकें। नरेन्द्र मोदी जी ऐसे नेता हैं जिन्हें वे डंसते हैं उन्हें हमेशा के लिए राजनीति से गायब कर देते हैं। याद कीजिए गुजरात में केशूभाई पटेल ने भाजपा को मजबूत किया,पाटीदार समाज ने भाजपा को सत्ता में लाने में मुख्य भूमिका निभाई। पर उन्हीं पाटीदार समाज से आने वाले मुख्यमंत्री केशूभाई पटेल को मोदी जी सुरत भूकम्प मामले में लापरवाही करने की बात आडवाणी जी को समझाकर केशूभाई को सत्ता से ऐसा बेदखल किया कि बाद में केशूभाई कहीं कभी आज तक दिखाई नहीं दिये। भाजपा को इस मुकाम तक पहुंचाने में मदद करने वाले विश्व हिंदू परिषद के अन्तर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और एशिया महादेश के प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डाॅ प्रवीणभाई तोगरिया,भाजपा के वरिष्ठ नेता और बजरंग दल के संस्थापक विनय कटियार,फायर ब्रिगेड नेत्री उमा भारती,वरिष्ट नेता और क्रिकेटर कीर्ति झा आजाद को दूध पडी़ मक्खी की तरह निकाल कर फेक दिया है। अपने गुरू आडवाणी जी के साथ जो कुछ मोदी जी ने किया है वह तो आप जानते ही हैं। अब खुद ही अंदाजा लगा लीजिए जो अपने गाॅड फादर आडवाणी जी का नहीं हुआ वे किसी दूसरे का क्या होगा? 

         सवाल उठता है आखिर देश की जनता क्या करें किधर जाये,किसे नेता बनाये ? क्योंकि कांग्रेस जो काम कर रही थी वही भाजपा भी कर रही है तो फर्क क्या है बस, सिर्फ सत्ता बदली है!? खुद को पिछड़े,दलित और अल्पसंख्यक समाज के रहनुमा प्रचारित करने वाले :-लालू प्रसाद यादव,मुलायम सिंह यादव, रामविलास पासवान,नीतीश कुमार, शरद पवार, रामदास आठवले,ममता बनर्जी, कुमार स्वामी जैसे सैकड़ों नेता कर क्या रहें हैं पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के विकास और अधिकार के लिए भाजपा में वर्षों से बैठे पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के नेता अपने समाज के विकास और अधिकार के लिए क्या रोड मैप बनाये हैं और क्या करना चाहते हैं यह हम सभी जानते ही हैं !? बस, इन्हें सिर्फ चाटुकारिता करके अपने फायदे के लिए पिछलग्गू बने रहना है। और अगर कुछ नहीं कर रहे हैं तो क्यों!? ऐसा इसीलिए कि हमारे पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के लोगों को इस विषय,मुद्दे पर विचार करने,चिन्तन -मनन करने के लिए न तो समझ है और ना ही समय। तो क्या होगा? होगा क्या बस, कटने के लिए अपनी बारी का इंतजार करो। क्योंकि संगठित तो हमारे पिछड़े,दलित और अल्पसंख्यक समाज के विभिन्न संगठनों के मनमानी करने वाले अहंकारी पदाधिकारी और राजनैतिक नेता तथा आम व्यक्ति होंगे नहीं। तो संगठित करके  लाभ देने के लिए कोई अवतार/फरिश्ता तो आएगा नहीं। बस! लड़ते रहो! कटते रहो! एक-दूसरे का आपस में छोटी छोटी बातें या बड़ी बातें का बहाना बनाकर खून बहाते रहो! इसका फायदा लेने वाले सवर्ण जाति के लोग ले रहें,पहले भी लिये हैं और भविष्य में भी लेते रहेंगे। 

 

शोधार्थी इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रयागराज