स्वच्छ भारत मिशन (नगरीय) के जिला कार्यक्रम प्रबंधक सरदार बलजीत सिंह पालिका अध्यक्ष के अधिकारों पर उठाये सवाल, खुलने लगी भ्रस्टाचार की परतें

शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर।  स्वच्छ भारत मिशन (नगरीय) के जिला कार्यक्रम प्रबंधक सरदार बलजीत सिंह सवाल उठाया है कि क्या मुजफ्फरनगर पालिका चेयरमैन मुझे पद से हटाने का अधिकार रखती है..? या झूठी वाह वाही के लिये फ़र्ज़ी खबर प्रसारित कराई है? उन्होंने कहा है कि मैं स्वच्छता भारत मिशन नगरीय में जिला कार्यक्रम प्रबंधक के पद पर जनवरी 2018 से तैनात हूं, कुछ दिनों से आरोप पर आरोप लग रहे हैं कि मैंने वित्तीय अनियमितताएं की है। हालांकि जिस पद पर  मैं तैनात हूं, उसमें किसी प्रकार के वित्तीय अधिकार नहीं दिए जाते ना ही मेरे द्वारा टेंडर खोलने अथवा किसी को देने का अधिकार है।  यह अधिकार केवल नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी एवं चेयरमैन को ही प्राप्त है या उनके द्वारा किसी अधिकारी को जो जेम पोर्टल पर रजिस्टर्ड हो।

जिला कार्यक्रम प्रबंधक सरदार बलजीत सिंह ने कहा है कि मेरी नियुक्ति राज्य मिशन निदेशक स्वच्छ भारत मिशन निदेशालय स्तर से की गई है। शासन के प्राप्त आदेशों  के अनुसार ही अधिशासी अधिकारी द्वारा मेरी जॉइनिंग जनपद मुजफ्फरनगर में हुई है और तनख्वाह नगर पालिका परिषद मुजफ्फरनगर के द्वारा नहीं लखनऊ से ही प्राप्त होती है।

जनपद की समस्त निकायों में स्वच्छ भारत मिशन से संबंधित जिम्मेदारी दी गई है और नियुक्त किए जाने के बाद नगर आयुक्त अथवा ईओ को आदेशित किया जाता है कि जिला कार्यक्रम प्रबंधक पद पर आए व्यक्ति को समुचित दफ्तर और उसके लिए तमाम आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाए।   

सरदार बलजीत सिंह ने कहा है कि मेरे ऊपर यह सब आरोप-प्रत्यारोप लगाने का यह कारण है कि स्वच्छ भारत मिशन नगरीय के अंतर्गत पैंतीस वाहन कूड़ा उठाने के लिए खरीदे जाने हेतु टेंडर नगर पालिका द्वारा निकाला गया, उनमें प्राप्त 11वाहन कंपनी बाग में खड़े थे। 14  मई 2020 को प्रशासनिक निदेशक लीगल ह्यूमन राइट्स संदीप दास द्वारा एक पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें खरीदे जा रहे वाहनों में अनियमितता के बारे में स्पष्ट किया गया था। मेरे द्वारा 19 मई 2020  को जांच की गई और खरीदे जा रहे सामान और संसाधनों की गुणवत्ता और दामों के विषय में नगर पंचायत बुढ़ाना एवं पुरकाजी के अधिकारियों से बात की गई तो पता चला कि वही ट्रीपर वाहन नगर पंचायत बुढ़ाना ने 4 लाख 50000 में, पुरकाजी नगर पंचायत में उच्च मानक वाहन 4 लाख 85 हज़ार में खरीदें गए। दोनों पंचायतों द्वारा दो-दो वाहन की खरीद की गई थी। वही मुजफ्फर नगर पालिका परिषद में 6 लाख 85 हजार में खरीदा गया, जबकि नगर पंचायत में दो-दो वाहन खरीदे जाने थे, लेकिन नगर पालिका मुजफ्फरनगर में एक साथ 35 खरीदे। इसके साथ ही जो ट्रिपर बुढ़ाना और पुरकाजी में गए हैं, उनमें बॉडी कंपनी द्वारा ही लगाकर उच्च क्वालिटी की दी गई है, जबकि मुजफ्फरनगर में केवल चेसिस टाटा के लिए गए और बाद में उनके ऊपर बॉडी बनवाई गई है। समस्त वाहन अधोमानक पाए गए हैंऔर शासन से प्राप्त स्पेसिफिकेशन से मैच नहीं कर रहे हैं।

सरदार बलजीत सिंह के अनुसार कंपनी बाग में खड़े ये ट्रिपर अब जंग भी खाने लगे है। नगर पालिका द्वारा लगभग दो लाख का भ्रष्टाचार प्रति वाहन किए जाने के संबंध में सूचना अधिशासी अधिकारी व प्रभारी अधिकारी स्थानीय निकाय को भी जानकारी पत्र द्वारा दी गई। जिला कार्यक्रम प्रबंधक ने कहा है कि केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान को भी मेरे द्वारा उक्त प्रकरण के विषय में बताया गया। मंत्री जी द्वारा कमिश्नर साहब को मेरी शिकायत पर पत्र लिखा था। उसके बाद से ही नगर पालिका एवं संबंधित ठेकेदार लगातार आरोप लगने शुरू हो गए। उन्होंने कहा कि मौखिक धमकियां भी दी गई कि तुम्हें नौकरी नहीं करने देंगे। सरदार बलजीत सिंह ने सवाल किया है कि अगर कोई पैसे का लेनदेन था तो ठेकेदार ने जांच के पहले क्यों नहीं शिकायत की ?  या जांच करने के उपरांत ही सभी आरोप क्यों मेरे पर लगाए गए ? क्यों फर्जी लोग खड़े किए गए कि नौकरी के नाम पर पैसे लिए गए हैं, क्योंकि मुझे हाईलाइट करके  ये लोग अपना भ्रष्टाचार छुपाना चाह रहे हैं।

जिला कार्यक्रम प्रबंधक सरदार बलजीत सिंह ने दावा किया कि प्रत्येक दशा में लगभग 70 लाख का घोटाला किया गया है, इसको छिपाने के लिए सभी षड्यंत्र रचे जा रहे हैं। उसी के तहत मेरे ऊपर कोतवाली में मुकदमा भी दर्ज कराया गया है।

दो ठेकेदारों का लेनदेन का आपसी मामला है, दोनों के द्वारा एग्रीमेंट के आधार पर ही लेनदेन किया गया है, तथाकथित ऑडियो में काट-छांट करके पेश किया जा रहा है।

सरदार बलजीत सिंह ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन नगरीय में जिला कार्यक्रम प्रबंधक का कार्य कार्यक्रम की देखरेख, निगरानी करना एवं शासन द्वारा प्राप्त आदेशों के अनुपालन में निकायों की प्रगति रिपोर्ट शासन को देना है एवं विभिन्न स्वच्छता अभियान की जानकारी देना और जागरूकता अभियान चलाना भी दायित्व में आता है। इस सब में नगर पालिका अध्यक्ष को कोई अधिकार नहीं दे रखे कि वह जिला कार्यक्रम प्रबंधक को अपने स्तर से तैनात कर सके या अपने स्तर से हटा सकें। अगर कोई अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि जिला कार्यक्रम प्रबंधक के कार्य से संतुष्ट नहीं तो वह उसे हटाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेज सकते हैं अथवा स्पष्टीकरण कर सकते हैं, परंतु चेयरमैन के पास कोई ऐसा अधिकार नहीं है कि वह जिला कार्यक्रम प्रबंधक को हटा सके।