ग़ज़ल


बलजीत सिंह "बेनाम",  शिक्षा वाहनी समाचार पत्र।


कहते रहे सभी कहीं मेरा निशां नहीं
जो ख़त्म वो कभी वो मेरी दास्तां नहीं


ये किस नज़र से आपने देखा है जाने जां
क़ाबू नहीं जिगर मेरा क़ाबू ये जां नहीं


जो इस नगर की शान को महफूज़ रख सके
अफ़सोस है नगर में ऐसा नौजवां नहीं


बरसों से हम मिले नहीं ये बात और है
ये बात और है कोई भी शादमां नहीं


103/19 पुरानी कचहरी कॉलोनी, हाँसी