एक रिटायर्ड फौजी का बड़ा सवाल, श्रीलंका में 1200 सैनिकों की जान देकर हमने क्या हासिल किया था







लद्दाख में देश की जमीन बचाते हुए शहीद हुए 20 सैनिकों पर कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवालों के बीच एक रिटायर्ड फौजी ओमसिंह राणा ने प्रश्नचिन्ह लगाते हुए बड़ा खुलासा किया है कि राजीव गाँधी अपने प्रधानमंत्रित्व काल में श्रीलंका की आधिकारिक यात्रा पर गए थे, उनके साथ तत्कालीन सेनाध्यक्ष भी थे। वहाँ राजीव गाँधी के सम्मान में दी गई डिनर पार्टी के दौरान उन्होंने श्रीलंका के राष्ट्रपति से वादा कर लिया कि LTTE से निपटने में उनकी सहायता करने के लिए भारत अपने सैनिक भेजेगा। ये सुनकर उसी जगह मौजूद हमारे सेनाध्यक्ष हैरान रह गए थे, क्योंकि इस तरह के महत्वपूर्ण निर्णय CCS (Cabinet committee on Security) की मीटिंग और RAW की सलाह के बगैर नहीं लिए जाते। राजीव ने बस निर्णय ले डाला और उसी जगह मौजूद सेनाध्यक्ष से एक बार पूछना भी उचित नहीं समझा। भारत लौटने के बाद RAW के चीफ ने उनके इस अविवेकपूर्ण निर्णय पर आपत्ति जताई और कहा कि वो किसी भी हाल में बिना इंटेलीजेंस इनपुट्स के भारतीय सैनिकों को एक अनजान, दुर्गम क्षेत्र में उतारने की सलाह नहीं देंगे, लेकिन राजीव जी नहीं माने।


सेनाध्यक्ष ने भी RAW चीफ की बात से सहमति जताते हुए इसे सैनिकों के लिए एक आत्मघाती मिशन बताया था, लेकिन राजीव गाँधी नहीं माने और उनके दबाव में अंततः IPKF को श्रीलंका भेज दिया गया था। 32 महीनों के इस मिशन में 1200 भारतीय सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए थे, इसमें से 200 की दुखद मृत्यु तो सिर्फ एक ही दिन में जाफना यूनिवर्सिटी में स्थित LTTE मुख्यालय पर कब्जा करने के प्रयास में हुई थी, जहाँ बिना किसी लोकल सपोर्ट या सटीक इंटेलीजेंस के बगैर हमारे सैनिकों को एयर ड्रॉप किया गया था और वो LTTE का आसान शिकार बन गए थे। LTTE के लड़ाके वहाँ के स्थानीय लोग थे, जिन्हें एक-एक सड़क, गली, जंगलों की सटीक जानकारी थी, जबकि हमारे सैनिक उन जगहों के लिए बिल्कुल नए थे और ऊपर से श्रीलंका की सेना ने हमेशा असहयोग किया था।


रिटायर्ड फौजी ओमसिंह राणा ने कहा कि उस मिशन का परिणाम और उसके बाद की घटनाओं से हम में से ज्यादातर लोग परिचित हैं। इसी मिशन से नाराज होकर प्रभाकरण ने राजीव गांधी जी की हत्या करवा दी थी। ओमसिंह राणा ने काँग्रेस से सवाल किया है कि अभी लद्दाख में हमारी जमीन बचाते हुए हमारे 20 सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए हैं तो अंधविरोधी कांग्रेसियों ने कोहर्राम मचा रखा है। रिटायर्ड फौजी ने कहा है कि यहाँ तो हम अपनी जमीन, अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं, क्या ये कांग्रेसी लोग इस भूतपूर्व फौजी ओमसिंह राणा को समझा सकते है कि श्रीलंका में 1200 सैनिकों की जान देकर हमने क्या हासिल किया था? बगैर सेना, इंटेलीजेंस (रॉ) की सलाह के 1200 सैनिकों को मौत के मुँह में झोंक देने वाले राजीव गांधी और उनके परिवार के भक्त मुझे और पूरे देश को जवाब दें।