चिकित्सकों का सदैव ऋणी रहेगा समाज (डॉक्टर्स डे "एक जुलाई" पर विशेष)

शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर। कोविड-19 को मात देने के लिए जिला अस्पताल में तैनात सभी चिकित्सक अपना फर्ज बखूबी निभा रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं डॉ. लोकेश गुप्ता, जो कोविड-19 के दौरान हमेशा दूसरो को मोटिवेट करते रहे और अपनी टीम के साथ हरदम जुटे रहे। कोरोना काल में उनके द्वारा किये गए सराहनीय कार्यों की हर कोई तारीफ़ कर रहा है। उन्होंने जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे के निर्देशन में बेहतरीन टीम वर्क के साथ काम किया। सिसौली से आने वाले सबसे गंभीर मरीज को डॉ. लोकेश ने बहुत ही मेहनत और होशियारी से संभाला। इतना ही नहीं प्रत्येक केस का जमीनी स्तर पर अध्ययन कर रिपोर्ट भी तैयार की। 23 मार्च के बाद से लगातार परिवार से दूर रहकर  फर्ज को अदा करना एक सराहनीय काम है। इसकी जनपद में काफी तारीफ हो रही है। लोगों का यही कहना है कि यह समाज दुनिया के तमाम चिकित्सकों का सदैव ऋणी रहेगा।


ईश्वर के बाद किसी से आशा रखी जाती है, वह है डॉक्टर। बीमारी के वक्त भगवान का नाम बाद में पहले डॉक्टर याद आता है। ऐसे ही है डॉ. वीके सिंह। जो जिला अस्पताल में कोविड-19 के दौरान अपनी सूझबूझ और समझदारी के बल पर स्पेशल ट्रेनिंग के लिए चुने गए। कभी दिन तो कभी रात में अपनी सेवा देते हुए डॉ. वीके सिंह ने न सिर्फ आशा, एएनएम,डॉक्टर्स, एमओआईसी बल्कि सभी संबंधित लोगों को कोविड-19 से बचने के साथ-साथ कोरोना परीक्षण की भी ट्रेनिंग दी। इतना ही नहीं जिलाधिकारी के निर्देशन में एनजीओ का एक ग्रुप बनाककर लोगों को हाथ धोने से लेकर मास्क लगाने और साफ-सफाई के लिए जागरूक भी किया।

ऐसे ही एक चिकित्सक है डॉ. शरण सिंह। वह परिवार से लगातार तीन महीने से दूर रहकर अपना फर्ज निभा रहे हैं। उनका कहना है कि लोगों की जान बचाना एक डॉक्टर की प्राथमिकता है। इसलिए उनका फर्ज उन्हें पहली श्रेणी में लाता है। उन्होंने कहा कि मरीज डॉक्टर की जितनी इज्जत करते है, डॉक्टर को भी मरीज की उतनी ही इज्जत करनी चाहिए। कोविड-19 के दौरान सभी लोगों ने उन्हें पूरा सहयोग किया है।


कोरोना संकट के मुश्किल वक्त  में चिकित्सकीय सेवा के प्रति हम आज दंडवत हैं। उनके सम्मान और उत्साहवर्धन के लिए कभी करोड़ों लोग दीपक जलाते हैं, तो कभी ताली-थाली-घंटी बजाते हैं तो कभी सेना के विमानों से पुष्पवर्षा करवाते हैं। जिस स्वास्थ्य सुविधाओं के बल पर दुनिया आज कोविड  से मुकाबला कर रही है, उसकी मेरुदंड (रीढ़) यदि डॉक्टर्स को कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। महान चिकित्सक रहे डा. बिधान चंद्र राय की स्मृति में हर साल एक जुलाई को डाक्टर्स डे मनाया जाता है | उनका जन्म एक जुलाई 1882 में बिहार के पटना जिले में हुआ था। 80 वर्ष की आयु में 1962 में अपने जन्मदिन के दिन यानी एक जुलाई को ही उनकी मृत्यु हो गई थी।