शनि जन्मोत्सव 22 मई को बनने रहा है सदियों पुराना दुर्लभ संयोग

राज शर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

 

शनिदेव नवग्रहों में उग्र स्वभाव के कारक है । पौराणिक वर्णन के चलते ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष अमावस्या के दिन शनिदेव जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस पवित्र दिवस्य के उपलक्ष पर शनिदेव की पूजा अर्चना करने से मानवों के सकल मनोरथ पूर्ण होते हैं एवं शनिदेव जीवन की समस्त बाधाओं का निवारण करके साढ़ेसाती ढैय्या आदि क्लिष्ट दशाओं को भी सुखद बना देते हैं। सूर्य पुत्र शनिदेव न्याय के अधिपति देव हैं। ज्योतिषीय कुंडली के अनुसार शनिदेव दशम, एकादश राशियों (मकर कुम्भ) के अधिपति देव माने जाते हैं। कर्मफल प्रदायक न्यायधीश शनिदेव मनुष्य के सभी प्रकार के सुकर्म एवं कुकर्मों का फल अपनी दृष्टि रूपी दशा के रूप में प्रदान करते हैं।

वर्ष 2020 में शनिदेव जन्मोत्सव पर दुर्लभ योग भी बनेंगे। कृतिका नक्षत्र रहेगा एवं चन्द्र अपनी उच्च राशि वृष में विराजमान रहेंगे इसके साथ ही छत्र योग का संयोग भी रहेगा। 

ॐ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्‌।

छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्‌।

इस वर्ष 22 मई को शनिदेव जन्मोत्सव का महापर्व मनाया जाएगा। लोकडॉउन के चलते भक्तजन घर पर भी शनिदेव की पूजा अर्चना कर सकते हैं। इस वर्ष चतुर्ग्रह एक ही राशि में रहेंगे। 972 साल पहले जो दुर्लभ संयोग बना था, वह इस बार 2020 मे पुनः बनने जा रहा है। ज्योतिष प्रमाण के अनुसार इस प्रकार की स्थिति 21 मई सन 1048 के दिन मंगलवार को बनी थी। इस वर्ष 22 मई 2020 शुक्रवार के दिन इस प्रकार की तदवद स्थिति बनेगी। सूर्य वृष राशि में,चन्द्र बुध एवं शुक्र सभी एक ही राशि में होने से इस दुर्लभ संयोग को बनाने जा रहे है। 

शनि जन्मोत्सव महापर्व की तिथि एवं मुहूर्त 2020

अमावस्या तिथि आरंभ - 09:37 बजे रात्रिकाल (21 मई 2020)

अमावस्या तिथि समाप्त - 11:09 बजे रात्रिकाल (22 मई 2020)

शनि जन्मोत्सव के उपलक्ष पर सुविधानुसार सरल उपाय-

1- एक लोटे में जल भरकर काले तिल डेल और उस जल को पीपल के पेड़ पर अर्पित करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं।

2- शनि से जुड़ी वस्तुएं काली उड़द की दाल, तिल, लौह और काले कपड़े का दान करना चाहिए।

3- शुद्ध बहते हुए पानी में नारियल का विसर्जित करें।

4-  इसी दिन शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे तिल या सरसों के तेल का दीपक जलाने से रुके हुए कार्यों में सफलता मिलती है।  

5- शनि जन्मोत्सव के अवसर पर काले उड़द पीसकर फिर आटे की छोटी-छोटी गोलियां बनाकर मछलियों वाले जलीय स्थान पर दान करे। 

6- अपना पुराना जूता इस दिन की शाम को चौराहे पर छोड़ आएं।

7- शं शनैश्चराय नमः मन्त्र का जाप करें तो लाभ होगा।

8- किसी शनि मंदिर में छायापात्र दान करें।


संस्कृति संरक्षक, आनी (कुल्लू) हिमाचल प्रदेश