माँ मेरा जीवन, अभिमान, मेरी आत्मा, मेरा कर्तव्य अंतिम साँस तक.........

वीरेन्द्र सिंह रावत, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

 

माँ क्या है त्याग, तपस्या, समर्पण। इतने शब्द है कि उसकी तुलना और माँ का रिण जीवन भर हम भर नहीं सकते है। मेरी कहानी 14 फ़रवरी 1970 को उत्तराखंड के पौड़ी जिले के कुलासू मे एक गरीब परिवार मे जन्म लेने से शुरू हुई थी। एक बहिन और 4 भाईयों में मेरे पिता सबसे मेरे से बड़े पिता गड़वाल राइफल्स मे थे। मैं 6 साल का था, तब होश सम्भाला तो पता चला माँ क्या होती है। माँ का त्याग और समर्पण आज भी याद आता है।  मेरी माँ मुझसे 6 जून 2019 को मेरे बिस्तर पर मेरे द्वारा सेवा करने के दौरान हार्ट अटेक से इस दुनिया से विदा हो गई थी। उनके अन्तिम शब्द थे कि मुझे भगवान का ध्यान करने दे, और वे उसी मे लिन हो गई।

मेरे जन्म के दौरान जब मेरी माँ का प्रसव पीड़ा हुई थी तो गांव से वैद्य 5 किलोमीटर दूर रहता था। ऐसे में वो पैदल गई थी। वैद्य ने उनका चैकअप किया और फिर वापस घर भेज दिया था। माँ फिर 5 किलोमीटर पैदल चल कर घर पहुची और पहुचते ही 15 मिनट मे मैने इस दुनिया मे जन्म लिया। कितना दर्द सह होगा मेरी माँ ने और जब भी देखभाल की तो खुद गीले मे सोती थी और मुझे सूखे मे सुलाती थी। हमारी अच्छी पड़ाई के लिए मेरी माँ सभी 5 भाई-बहन को गांव से देहरादून लेकर आयी थी। इसके बाद पता नहीं मेरी माँ कितने किलोमीटर पैदल चली होगी और क्या क्या कष्ट सहे होंगे। देहरादून आकर हमे उचित शिक्षा दी, 4 बजे सुबह उठाती थी पड़ने के लिए। खुद नहीं पड़ी लिखी थी, लेकिन पड़ाई की कीमत पता थी। सभी को अनुशासन मे रहकर घर का काम, दूध बेचना, जानवरों की देखभाल, घास काटना लाना, गन्ने छीलना, जंगल से लकड़ी लाना, सब कुछ खुद भी किया और हमे भी सिखाया। भारी घास और लकड़ी सर पर रखती थीं। जाड़ा, गर्मी, बरसात सभी परस्थितियों मे हमे पढ़ाया और अच्छा इंसान बनाया। जीवन भर दुनिया के ताने सुने, पर अपनी मेहनत, लगन, अनुशासन, परिश्रम से हमे जीवन मे कई मुश्किलों से बाहर किया। खुद कम खाया, पर हमारा पेट पहले भरा। ऐसी थी हमारी माँ।

आज माँ ना होती तो मैं आपके बीच ना होता। माँ की यादे और माँ का स्मरण जीवन भर मेरे हृदय और आत्मा मे विराजमान रहेगी। माँ का कर्ज कोई भी नहीं चुका सकता। आज मदर डे पर मेरी यही विनती है कि माँ! जहां भी हो बस अपनी कृपा और आशीर्वाद जीवन भर बनाए रखना, कि अंतिम साँस तक समाज का भला कर सकू निस्वार्थ भाव से।


खेल के विकास के लिए जीवन समर्पित, उत्तराखंड आंदोलनकारी

अनगिनत अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय और स्टेट अवार्ड से सम्मानित