छठी जेपीएससी पर नियुक्ति नियमावली का पालन किए बिना भाई-भतीजा-वाद करने का आरोप



शि.वा.ब्यूरो, रायपुर। जेपीएससी आंदोलनकारी छात्र नेता देवेन्द्र नाथ महतो सुरेन्द्र पासवान, अजय चौधरी, अजय टोप्पो, मनोज यादव, संजय महली, उमेश प्रसाद, इमाम सफी ने बताया कि जब छात्र कोरोना वायरस के महामारी से विवश होकर घर के अंदर है, तब लॉकडाउन का फायदा उठाते हुए विवादित छठी जेपीएससी का घोपला करते हुए परीक्षा परिणाम जारी किया जाता है। पूरी नियुक्ति प्रक्रिया में कहीं भी आरक्षण नियमावली, आयोग का नियमावली तथा सुप्रीम कोर्ट के गाईड लाईन का पालन नहीं किया गया है। आयोग के भ्रष्ट अधिकारियों ने सीट घेापला करने के लिए नियम का पालन किए बिना पूरी प्रक्रिया में भाई भतीजा बाद किया है।




छठी जेपीएससी का प्राप्तांक आयोग के नियम विरूद्ध जारी किया गया है। विज्ञापन और सिलेबस दोनों में लिखा गया है कि पेपर वन अनिवार्य विषय के रूप में हिंदी और अंग्रेजी दो खंड में 50-50 अंक के कुल 100 पूर्णांक की परीक्षा होगी, जो क्वालीफाइंग पेपर है। इसमें सिर्फ 30 अंक लाना है, जो पांचवीं जेपीएससी में पालन भी किया गया था तथा ये यूपीएससी समेत पूरे देश के सभी राज्यों के लोक सेवा आयोग में यही नियम का पालन किया जाता है, परन्तु  पहली बार छठी जेपीएससी में सीट का घोपला करते हुए अनिवार्य विषय हिंदी और अंग्रेजी क्वालीफाइंग विषय के कुल प्राप्तांक को भी मेरिट लिस्ट में जोड़ा गया, जो नियम के विरोध है। ये किसी भी छात्र को मालूम नहीं रहने के कारण इस विषय की तैयारी भी किसी ने नहीं की थी।  इससे वैसे छात्रों को दोहरी लाभ पहुंचाया गया, जो छात्र क्षेत्रीय भाषा के रूप अंग्रेजी तथा हिन्दी विषय का चयन किया था। वैसे छात्रों को एक ही विषय पढ़कर पेपर टू तथा पेपर वन दोनों विषय में कुल 250 अंक का सीधे लाभ मिला ऐसे स्थिति में झारखंड के क्षेत्रीय तथा जनजातीय भाषा पढ़ने वाले छात्र मेरिट लिस्ट से वंचित हो गए हैं, इससे महाघोटाला प्रतीत होता है।

   इसके अलावा अन्य गड़बड़ी के रूप में बीसी-टू के अभ्यार्थी राज्य सरकार के कर्मचारी जिसका क्रमांक 68015920 है। आरक्षण नियमावली के अनुसार इसका चयन अनारक्षित वर्ग के प्रशानिक पद में होना था, परन्तु आयोग ने इसका परीक्षाफल आरक्षित वर्ग में ही पुलिस सेवा के रूप में किया है। चूंकि विज्ञापन के कंडिका में साफ लिखा है कि राज्य सरकार के वैसे कर्मी जिन्होंने तीन वर्ष लगातार सेवा पूरी कर ली हो, उनको पांच वर्ष की उम्र सीमा का लाभ दिया जाएगा।

   इसके अलावा आयोग ने कुछ परीक्षार्थियों जिसका कटऑफ मार्क्स से कम अंक आया है उनका भी मेरिट लिस्ट में रिजेल्ट जारी किया है तथा कुछ परीक्षार्थी जो कटऑफ मार्क्स के बराबर अंक प्राप्त किए हैं, परन्तु उनको फैल किया गया है। कटऑफ मार्क्स से कम अंक प्राप्त करने के बाद भी आयोग द्वारा प्रकाशित फाइनल रिजल्ट में महेंद्र महतो का नाम आता है, जिसका क्रमांक 68017146 जो जो पिछड़ा वर्ग वन के सदस्य हैं। जिसको पेपर वन का 48 नम्बर मिलाकर लिखित परीक्षा में 539 मिला है तथा इंटरव्यू में उन्हें 54 नम्बर प्राप्त हुआ है। इस तरह कुल मिलाकर इन्हें 593 अंक प्राप्त हुआ है, जबकि आयोग ने पिछड़ा वर्ग वन के लिए कटऑफ मार्क्स 594 जारी किया है। इस प्रकार महेंद्र महतो को कटऑफ से एक नम्बर कम मिला है। फिर भी आयोग ने वित्त सेवा के लिए चुना है। इस गंभीर मामले में अभी आयोग ने लीपापोती कर रही है।

      इसी तरह आयोग ने अन्य गड़बड़ी करते हुए एक सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी अल साईद को कटऑफ मार्क्स के बराबर 600 अंक लाने पर भी फैल घोषित किया है, जिसका क्रमांक 68075752 है। उन्होंने पेपर वन का 60 अंक मिलाकर लिखित परीक्षा में 545 अंक प्राप्त करता है तथा इंटरव्यू से 45 अंक प्राप्त होता है। इस प्रकार इन्हें कुल 600 अंक कटऑफ अंक के बराबर अंक प्राप्त होता है, परन्तु इसका रिजल्ट जारी नहीं होता है जिसका आयोग के पास कोई जवाब नहीं है।