हिन्द खतरे में हमारा साथियों

पवन शर्मा परमार्थी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। 


हिन्द खतरे में हमारा साथियों, 
हिन्द ने हमको पुकारा साथियों,
आओ मिलके हिन्द की रक्षा करें,
हिन्द से कोई न प्यारा साथियों ।


हम करोड़ों हिन्द की सन्तान हैं,
हिन्द का हर शख्स शक्तिमान है,
हिन्द हमारा धर्म और ईमान है,
हिन्द हमारी आन-बान-शान है।


अंग जितने हिन्द के हैं साथियों,
दर्द से पीड़ित हुए हैं साथियों,
उपचार मिलके सारे हिन्द का करें,
जख्म गहरे हिन्द के हैं साथियों ।
हिन्द खतरे में हमारा साथियों ।।


हिन्द की गरिमा पे हमको नाज है,
हिन्द का एक अलग अन्दाज है,
हिन्द का रक्षक जवां जांबाज है,
एशिया का हिन्द ही सरताज है।


हिन्द की सीमा सम्भालो साथियों,
आबरू अपनी बचालो साथियों, 
आक्रमण कोई करे जवाब दो,
हाथ में हथियार उठालो साथियों,
हिन्द खतरे में हमारा साथियों ।।


देशद्रोही हिन्द में कुछ हो रहे,
उग्रता के बीज मन में बो रहे,
विदेशियों के बोझ हम ढो रहे,
राष्ट्र की सम्पत्ति को ही खो रहे।


आदमी से प्यार छूटा साथियों,
धर्म का प्रचार झूठा साथियों,
व्यभिचार अब पूजाघरों में हो रहे,
सन्त बनकर हिन्द लूटा साथियों ।
हिन्द खतरे में हमारा साथियों ।।


नव युवाओं और बच्चों ध्यान दो,
दीन दुःखियों को नई मुस्कान दो,
अपने हाथों हिन्द की कमान लो,
एक नया सन्देश औश् सम्मान दो।


हिन्द ही दौलत हमारी साथियों,
हिन्द ही गैरत हमारी साथियों,
हिन्द का अपमान जो न कर सके,
ऐसी ताकत हो हमारी साथियों ।
हिन्द खतरे में हमारा साथियों ।।


कुर्सी के भूखे हिन्द को हैं खा रहे,
नाश बनकर हिन्द पर हैं छा रहे,
कुछ राष्ट्रद्रोह के ही गीत गा रहे,
आतंकियों की पीठ थपथपा रहे,


नाश लीला से बचो ए साथियों,
ना इशारों पर नचो ए साथियों,
स्वार्थहित को छोड़कर परमार्थी,
एक नया भारत रचो ए सथियों ।
हिन्द खतरे में हमारा साथियों ।।


कवि-लेखक, दिल्ली