सावित्री फुले चालीसा

डॉ. दशरथ मसानिया,  शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

खांडोजी की आत्मजा, सावितरी धर नाम।
नारी को शिक्षित किया, कहत हैं कवि मसान।।

जय जय जय सावित्री बाई।
तुम्हरी कीरति सब जग छाई।।1
शिक्षाविद् साहित सुखदाई।
नारी जग में अलख जगाई।।2
मां शारद से आशिष पाई।
शिक्षा की तुम ज्योति जलाई।।3
महाराष्ट्र में जिला सितारा।
धरती पर आया इक तारा।।4
मां लक्ष्मी की कोख से आई।
गांव गली में खुशियां छाई।।5
जनवरी तीन शनिचर बीसा।
सन अट्ठारह सौ इकतीसा।।6
नौ साल में ब्याह रचाया।
बाल विवाह से धोखा खाया।।7
दीन दुखी की संकट हारा।
तनमन बल से दिया सहारा।।8
पतीदेव ने तुम्हें पढ़ाया।
समाज सेवा पथ अपनाया।।9
नारिन में बल तुमसे आया।
ज्योति बा ने साथ निभाया।।10
शिक्षक पहली बनकर आई।
पतितों को पथ दिया दिखाई।।11
सीधी सादी भोली भाली।
नारी पीड़ा हरने वाली।।12
दुर्गा जैसी हिम्मत वाली।
सरस्वती से विद्या पाली।।13
भूख प्यास को सहने वाली।
स्वाभिमानी बुद्धि शाली।।14
भाष मराठी मीठी बोली।
ज्ञानदान से भर दी झोली।।15
पत्थर भी तुम पर बरसाये।
फेंक गंदगी मान गिराये।।16
अबला दुखड़ा तारन हारी।
दुष्ट जनों पर पड़ती भारी।।17
जो तुमने अभियान चलाया।
कोई उसको रोक न पाया।।18
सती प्रथा को तुमने रोका।
बाल विवाहों को भी टोका।19
घर घर विद्या दीप जलाया।
मां बहिनों को पाठ पढ़ाया।।20
सारा जीवन दांव लगाया।
मानवता का मान बढ़ाया।।21
शेष बाद में
दरबार कोठी 23, गवलीपुरा आगर, (मालवा) मध्यप्रदेश