एक अनूठा साहित्यक कार्यक्रम है सोशल मीडिया पर फेसबुक लॉइव साहित्य कला संवाद

उमा ठाकुर, शिमला। हिमाचल कला संस्कृति एवं भाषा अकादमी द्वारा सोशल मीडिया का प्रयोग करते हुए गत 24 मई 2020 से फेसबुक पेज पर लाइव "साहित्य कला संवाद" कार्यक्रम शुरू किया गया, जिसके तहत सभी कलाकारों व साहित्यकारों को समान रूप से अवसर प्रदान  किया जा रहा है। अकादमी हर वर्ष बहुत से साहित्यक आयोजन करती आ रही है, परन्तु इस वर्ष कोरोना काल के चलते  कार्यक्रम हिमाचल अकादमी के फ़ेसबुक पेज़ पर साहित्य कला संवाद के तहत हर रोज़ सांय सात बजे प्रसारित किया जा रहा है।

इसकी सफलता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 31अगस्त  2020 तक अकादमी  के100 एपीसोड फेसबुक पर लॉइव प्रसारित हो जाएंगें।.इस कार्यक्रम में  हिमाचल के साथ साथ देश-विदेश के युवा और वरिष्ठ साहित्यकार, कवि, लेखक, कलाकार जुड़े और आकादमी के प्रयासों में अपना बहुमूल्य योगदान दिया।  

साहित्य  कला संवाद कार्यक्रम में जिन साहित्यकारों व कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी उनमें वरिष्ठ साहित्यकार सुदर्शन वशिष्ठ ,डॉ कर्म सिंह, डॉ इन्द्र सिहं ठाकुर, अखिलेश मिश्रा, डॉ प्रत्युष गुलेरी, मदन हिमाचली, डॉ गौतम शर्मा व्यथित, डॉ सत्यनारायण स्नेही, गज़लकार नवनीत शर्मा, पेशवरी शर्मा, रूही जूही जम्मू से, सस्कृत कवि कृष्ण मोहन पांडेय, चर्चित कवि आत्मा रंजन, अनन्त आलोक, कल्पना गागंटा, डॉ प्रियंका वैध्, डॉ अदिति गुलेरी, गंगा राम राजी, सरोज परमार, पोमिला सिहं, कृष्णा ठाकुर, लता शर्मा, डॉ देव कन्या, गज़लकार सुमित राज वशिष्ठ, कुलदीप तरूण गर्ग, सुरेश शांडिल्य, नेम चंद अजनबी, बह्मा नन्द देवरानी, दीप्ति सारस्वत, दीपक शर्मा, राजेश सारस्वत, उमा ठाकुर आदि ने अपनी दमदार प्रस्तुति दी। सभी दर्शकों ने जहां इस कार्यक्रम को पसन्द किया और मुक्त कंठ से सराहना भी की वहीं कुछ आलोचनाओं के चलते समय समय पर आकादमी सचिव डॉ. कर्म सिहं जी ने दर्शकों की रूचि को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम में कुछ बदलाव भी किए । प्रतिक्रियाओं की अगर बात करें तो लगभग तीन महीना पहले शुरू हुए इस कार्यक्रम में हिमाचल अकादमी के फेस बुक पेज पर अब तक करीब दस हज़ार  साहित्य व कला प्रेमी जुड़ चुके हैं, जो कार्यक्रम की सफलता दर्शानें के लिए काफी है।  इसके लिए  हिमाचल आकादमी के सभी उच्च अधिकारी, सचिव डॉ कर्म सिंह, संयोजक हितेंन्द्र शर्मा व अकादमी की पूरी टीम बधाई के पात्र हैं। साथ ही सभी साहित्यकार, कलाकार व तमाम दर्शक भी जिन्होंने कार्यक्रम को इतने कम समय में सफलता के शिखर तक पहुंचाया और कला व साहित्य संरक्षण में अमूल्य योगदान दिया।