शोषितों के शापित देवता विश्वनाथ प्रताप सिंह


आज राजा और राजनीति के मायने बदल गए है, सदियों पहले राजा पर मंत्रियों की मन्त्रणा का असर होता था। आज जनप्रतिनिधि, मंत्री, धनप्रतिनिधि प्रधानमंत्री का गुलाम होता है। तथागत (खाली हाँथ चले जाने वाले) राजकुमार सिद्धार्थ (बुद्ध) के बाद एक साधारण जमींदार परिवार में जन्में राजा मंडा के उत्तराधिकारी विश्वनाथ प्रताप सिंह को राजप्रसाद रास नही आया। वे चाहते तो आजादी के बाद तमाम राजघरानो की सन्तानो की तरह अमेरिका, लंदन के प्रवासी बन विलासिता का जींवन जी सकते थे, पर उन्होंने अपनी संपति को विनोवा जी के भुदानयज्ञ में आहुति देकर सत्ता से समता का कंटकीर्ण मार्ग को चुना। पढ़ाई के दौरान ही राजनैतिक समाजिक गतिविधियों में सक्रिय विश्वनाथ प्रताप सिंह ने कांग्रेस के साथ काम किया। अपनी उदार व कड़क कार्य कार्यशैली से राजनीति में विशिष्ट स्थान बनाकर देश के सबसे बड़े सूबे डाकू प्रधान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन दस्यु मुक्त उत्तम प्रदेश बनाने का काम किया, जिनमे से कुछ डकैत साथियों सहित सफ़ेद सन्त बन सदन तक आ पहुचे। उन्हें चंबल की कंटीली दलाली से सदन की मुलायम कुर्सी की दलाली ज्यादा रास आयी।
रक्षामंत्री बनने के दौरान देश भक्त कवि ह्र्दय राजा विश्वनाथ प्रताप को देश पर सत्ता किसकी है ..? इसका एहसास तब हुआ, जब रक्षा सौदों पर विदेशी ताक़तों का तगड़ा मकड़जाल देखा। उनके अंदर का देशभक्त राजा जाग उठा, वे अपनी ही सरकार कांग्रेस से बग़ावत कर बैठे और विदेशी ताकतों के हाँथ खेल रही कांग्रेस को खत्म करने के संकल्प के साथ युद्ध का बिगुल बजा दिया। फिर क्या.. "बजा नगाड़ा जनता दल का" कांग्रेश धरातल में चली गयी। राजा साहब भारत के सबसे ताक़तवर नेता के रूप में लोकप्रियता के शिखर पर खड़े हो गए, किन्तु राजा साहब की सह्रदयता,विदृता पर सहयोगी दलों की दुष्टता भारी पड़ गयी। अमीरो के ख़िलाफ़ ग़रीबो के संविधान सम्मत एक फैसले ने "राजा नही फ़क़ीर है देश की तकदीर है" जन जन के नारे को "राजा नही रंक है देश का कलंक है" में तब्दील कर दिया। देश की जनता व उनके सवर्ण समाज का दुर्भाग्य है कि राजा भईया जैसे न जाने कितने चंबल के "सफेद सन्तो" व "भगवा सन्तो" के प्रवचनों को सुनकर चरणामृत ले रहे है।
आज अभी भी मेरा देश उस चंडाल चौकड़ी (देश की अस्मिता के सौदागरों ) व विदेशियों के शिकंजे से मुक्त नही हो सका है। बाबा साहब के संविधान को सच्चे अर्थों में सन्मान देने वाले बोधसत्व सन्त राजा विश्वनाथ प्रताप सिंह जी आप हमारे दिलों में रहेंगे,
आज नही तो कल आपको इस देश का 85% अन्य पिछडा वर्ग समझेगा, सराहेगा।