जीवनभर हर किसी के कल्याण के लिए काम करते रहे युग दृष्टा, पदम भूषण, पदम श्री से सम्मानित वीतराग स्वामी कल्याण देव जी महाराज

सत्यप्रकाश रेशू, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।










 

129 वर्षीय संत के रूप में साक्षात भगवान स्वामी कल्याण देव को शत-शत नमन। तीन युवकों के युग दृष्टा पदम भूषण, पदम श्री से सम्मानित वीतराग स्वामी कल्याण देव जी हर किसी के कल्याण के लिए कल्याणकारी काम करते रहे। गरीब, किसान, मजदूर, व्यापारी, उद्योगपति,राजनेता, अधिकारी हर कोई स्वामी जी की कार्य शैली से प्रभावित होकर चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करता रहा। रामलीला के मंचन से प्रभावित होकर प्रयाग की त्रिवेणी संगम में शुकतीर्थ के जीर्णोद्धार का संकल्प लेने वाले स्वामी कल्याण देव जी को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी स्वामी,स्वामी विवेकानंद आदि की साथ देश की आजादी के लिए काम करने का शुभ अवसर मिला। अनेको अस्पताल, गौशाला, शिक्षा संस्थान, शुगर मिल, प्रार्थना स्थल, आश्रम अन्य क्षेत्र आदि की स्थापना कराने वाले संत श्री किसी भी संस्थान का अन्न-पानी  ग्रहण नहीं करते थे। ग्रामीण क्षेत्रों का विकास,  धर्मशालाओं का निर्माण, भोजन व्यवस्था आदि स्वामी जी के प्राथमिक कार्यों में रहे।

सभी धर्मों के लोगों को साथ लेकर चलने वाले स्वामी कल्याण देव जी का देश की स्वतंत्रता में विशेष योगदान रहा। अंग्रेज अधिकारी भी स्वामी जी का सहयोग लेना अपना गर्व समझते थे। पैदल-चलना, गन्ना, मूंगफली, गुड़- चना खाना, भिक्षा का भोजन ग्रहण करना, हर समय सबकी मदद करना, गर्मी-सर्दी बरसात में हर सार्वजनिक काम को प्राथमिकता पर करना स्वामी जी की विशेषताएं थी।

देश के कई राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री,  राज्यपाल आदि स्वामी जी के सीधे संपर्क में रहे। जिस कारण डॉ राजेंद्र प्रसाद,जवाहरलाल नेहरु,ज्ञानी जैल सिंह राजा विश्वनाथ प्रताप सिंह, मुलायम सिंह यादव, योगी आदित्यनाथ आदि शुकतीर्थ आए। स्वामी जी के प्रयासों के कारण श्रीमद् भागवत कथा स्थल का जीर्णोद्धार हो सका। जहां वटवृक्ष के नीचे श्री सुखदेव जी ने राजा परीक्षित को  श्रीमद् भागवत कथा सुनाई थी। इसके बाद अनेकों कथा वाचको  विद्वानों आदि ने शुकतीर्थ के महत्व को समझा एवं विकास कार्य शुरु हुए। मुझे अल्प आयु में स्वामी जी का आशीर्वाद मिला। उन्ही के मार्गदर्शन में कई सेवा कार्यों का शुभारंभ हुआ। जिसके फल स्वरुप उन सभी कामों को आगे बढ़ाया गया जो स्वामी जी को पसंद थे। अनेकों अवसरों पर स्वामी जी की साथ जाने, सेवा करने एवं समर्पण करने की बात समझी। स्वामी जी सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबके साथ, सबके लिए वाली बात कहां करते थे। जिसे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपनाया। इससे भारत विश्व महाशक्ति बनेगा।  पैदल चलना, सबकी सुनना, फटे कपड़े पहनना, कम खाना 129 वर्ष की आयु में बिना चश्मे अखबार पढ़ना, पत्र लिखवाना स्वामी जी को बहुत प्रिय थे। मुझे स्वामी जी के लिए कई बार भोजन मांग कर लाने का शुभ अवसर मिला। क्योंकि स्वामी जी सदैव भिक्षा में प्राप्त भोजन ग्रहण करते थे। साथ ही कभी भी राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री, राज्यपाल, उद्योगपति घरानों का भोजन ग्रहण नहीं करते थे। उनकी पुण्यतिथि पर शत-शत नमन एवं उनके सभी शुभचिंतकों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं।जय हिंद जय भारत। 

 

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