दहेज में कोठी ( लघु कथा)

मदन सुमित्रा सिंघल, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

आनंदी अपने परिवार का लालन पालन लोगों के घरों में झाड़ू बर्तन साफ सफाई करके करती थी. नौ बच्चों में बङी बेटी इमरती की शादी करनी थी, इसलिए चंदनमल की कोठी में जाकर सेठजी को शादी में सहायता के लिए गुहार लगाई तो चंदन सेठ ने पांच सौ रूपये वस्त्र आदि सहर्ष दे दिया।  बेटी की बिदाई के समय वरपक्ष ने दहेज की मांग की तो आनंदी ने घोषणा करते हुए कहा कि मैं इमरती को दहेज में सेठ चंदनमल की कोठी देती हूँ, आज से मेरा कोई कोई अधिकार नहीं कल से इमरती मेरी जगह दायित्व संभालेगी। आनंदी का त्याग देखकर सब भावुक हो गए। नयी नवेली इमरती आज चंदन कोठी में प्रवेश किया। उसकी आँखों में आंसू थे, लेकिन खुशी का कोई ठिकाना नहीं था।
पत्रकार एवं साहित्यकार शिलचर, असम