आदिकाल के दोहे

डॉ. दशरथ मसानिया,  शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।  

आदि भक्ति अरु रीतिका,अरू आज का ज्ञान।
फारस से हिंदी मिली, भाषा उर्दू नाम।। 1

भाषा भाषी एक हैं, मन का करो मिलान।
हिंदी भारत प्राण है, कहत है कवि मसान।।2

हिंदी हिन्दुस्तान में ,सकल करें व्यवहार।
बावन आखर खोज लें,जो इसका आधार।।3

भाषाओँ में एक है , हिंदी सुंदर फूल।
हिंद देश विकसित हुआ, भाषा पाई मूल।।4

गारस द तासी लिखा, इन्दुई एन्दुस्तान।
ग्रियसन मिश्रा बंधु ने, गाया हिंदी गान।।5

रामचंद्र विद्वान ने, लिख हिन्दी इतिहास।
हिंदी साधक ज्ञान हित, शारद सा विश्वास।।6

संवत सहस पचास में, हुआ आदि का आन।
तेरह सौ पचहत्तरा, काल हुआ अवसान।।7

हेम सोम विद्याधरा, अरु सारंगधर जान।
अपभ्रंशभाषा के कवि, कहत है कवि मसान।।8

प्राकृत पिंगलसूत्र है, विद्याधर का ज्ञान।
हेम शब्दानुशासना, साहित्य रचा बखान।।9

नरपति नाल्ह दलपती, अरु चंद बरदाइ।
जगनिक अरु विद्यापति,खुसरो आदि कहाइ।।10

खुमान पृथ्वी बीसली, पहेलियां परमाल।
वीरगाथा ग्रंथ हुआ, पदावली विजपाल।।11

आदिकाल वीरों कथा,खुसरों की पहचान।
आल्हखंड जगनिक की,रासो रचा प्रमाण।।12

सजीव युद्ध वर्णन किया, रचना चरित बखान।
भाषा तो मिश्रित बनी, वीर कवी दरबान।।13

अमीर खुसरो काव्य में, पहलिन की भरमार।
आल्हा ऊदल वीर रस, साहस के भंडार।।14

पृथ्वीराज रासो लिखा,पेज ढ़ाई हजार।
आदिकाल के ग्रंथ में, वीर अरू सिंगार।।15

वीर चंदवरदाइ कवि ,कहि पृथ्वी से आन।
दुश्मन बैठो मंच पे, मत चूके चौहान।।16

विद्यापती पदावली, राधेश्यामा रास।
पद पद में राधा रमण, करते रहे प्रकाश।।17

मैथिल कोकिल नाम था, भक्ति रूप श्रृंगार।
आदिकाल साहित लिखा,कविता भइ दरबार।।18

राजाश्रित चारण कवि, राजाओं का गान।
वीर और श्रृंगार रस, छप्पय दोहा आन।।19

बीस लिखें दोहे सुनो , आदि काल का सार।
शिष्य गुरू मिल बाँचिये, कहत हैं कवि विचार।।20
23, गवलीपुरा आगर, (मालवा) मध्यप्रदेश