विन्ध्याचल ओरिएंटल सीरीज द्वारा लिया गया 'मिर्ज़ापुर गज़ेटियर' के पुनर्प्रकाशन का निर्णय

 





अवधेश कुमार अवध, मिर्ज़ापुर। विन्ध्याचल मण्डल के आयुक्त कार्यालय में आज आयुक्त योगेश्वरराम मिश्र एवं प्रभाश्री ग्रामोदय सेवा आश्रम देवगढ़ के सचिव डॉ. जितेन्द्रकुमार सिंह 'संजय' के नेतृत्व में आये शिष्टमण्डल के बीच डेढ़ घण्टे की महत्त्वपूर्ण बैठक सम्पन्न हुई, जिसमें मिर्ज़ापुर जनपद के पुराने रिकॉर्ड्स को संरक्षित करने के लिए कई अहम निर्णय लिये गये। बैठक में 'विन्ध्याचल ओरिएंटल सीरीज़' के प्रकाशन की योजना बनायी गयी। आगामी 30 सितम्बर को मिर्ज़ापुर जनपद के 226वें स्थापना दिवस के पूर्व सर डी.एल. ड्रेक-ब्रॉकमैन कृत 'मिर्ज़ापुर गज़ेटियर' (1911 ई.) के पुनर्प्रकाशन का निर्णय लिया गया। इसी क्रम में कैप्टन जे.टी. ब्लण्ट कृत 'नेरेटिव ऑफ़ ए रूट फ़्रॉम द चुनारगढ़ टू येरनागूदुम् इन द एलोर सरकार' (1795 ई.), ई. बेनेट कृत 'बड़हर राज केस जजमेण्ट (1915 ई.) एवं क़ाज़ी मुहम्मद शरीफ़ कृत 'तवारीख़-ए-भदोही' (1847 ई.) के पुनर्प्रकाशन का निश्चय किया गया है। इन आधार ग्रन्थों के प्रकाशन के साथ ही 'मिर्ज़ापुर का इतिहास', 'सोनभद्र का इतिहास', और 'भदोही का इतिहास' हिन्दी और अंग्रेज़ी में पृथक् पृथक् प्रकाशित होंगे। 


ज्ञातव्य है कि 'मिर्ज़ापुर गज़ेटियर' के लेखन और सम्पादन की कहानी 1881 में 'इम्पीरियल गज़ेटियर ऑफ़ इण्डिया' के प्रकाशन के साथ प्रारम्भ होती है, जिसे सर डब्ल्यू. डब्ल्यू. हण्टर द्वारा लिखा और टर्बनर एण्ड कम्पनी, लन्दन द्वारा प्रकाशित किया गया। इस पुस्तक में मिर्ज़ापुर ज़िले (खण्ड VI, पृष्ठ 390-396) का संक्षिप्त परिचय है। 1883 में इम्पीरियल गजेटियर के प्रकाशन के दो वर्ष बाद सर डब्ल्यू. ग्रियर्सन जैक्सन ने 'मिर्ज़ापुर गज़ेटियर' को एक स्वतन्त्र पुस्तक के रूप में लिखा और सर एफ. एच. फिशर ने जिसका सम्पादन किया। शनैः शनैः 'मिर्ज़ापुर गज़ेटियर' का वह संस्करण समाप्त हो गया, किन्तु उनकी माँग बनी रही। बुद्धिजीवियों की माँग को देखते हुए सर डी. एल. ड्रैक-ब्रॉकमैन ने 1911 में दूसरी बार 'मिर्ज़ापुर गज़ेटियर' का लेखन और सम्पादन किया, जो सर्वाधिक लोकप्रिय हुआ। वह संस्करण भी कुछ वर्षों में समाप्त हो गया। सर डी. एल. ड्रेक-ब्रॉकमैन वरिष्ठ आई.सी.एस. अधिकारी थे। उन्होंने आंग्ल सरकार में अपनी प्रतिभा के बल पर अनेक स्मरणीय कार्य किये हैं। उनकी लेखकीय क्षमता अप्रतिम थी। उन्होंने न केवल 'मिर्ज़ापुर गज़ेटियर' तैयार किया, अपितु बाँदा, आज़मगढ़, इटावा, मेरठ, जलौन, हमीरपुर, झाँसी आदि के भी गज़ेटियर तैयार किये हैं।

मिर्ज़ापुर के इतिहास के दृष्टि से वरिष्ठ आई.सी.एस. अधिकारी डगलस देवार की गवर्नमेण्ट प्रेस, इलाहाबाद से सन् 1920 में प्रकाशित 'ए हैण्ड-बुक ऑफ़ द इंग्लिश प्रि-म्यूटिनी रिकार्ड्स इन द गवर्नमेण्ट रिकार्ड्स रूम्स ऑफ़ युनाइटेड प्राविंसेस ऑफ़ आगरा एण्ड अवध' संज्ञक पुस्तक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। इस पुस्तक के अध्याय 32 एवं 33 में मिर्ज़ापुर ज़िले की स्थापना से लेकर गदर के पूर्व तक का विस्तृत इतिहास दिया गया है। यही एक मात्र पुस्तक है, जिससे पता चलता है कि है कि मिर्ज़ापुर ज़िले की स्थापना 30 सितम्बर, 1795 को हुई थी। यह पुस्तक भी वर्तमान में अनुपलब्ध है। 

आज़ादी के बाद सन् 1987 में डॉ. परमानन्द मिश्र ने 'मिर्ज़ापुर गज़ेटियर' का सम्पादन किया, किन्तु इस संस्करण में ऐतिहासिक तथ्यों को संक्षिप्त कर दिया गया और कई सरकारी विवरण समाविष्ट कर दिये गये। मिर्ज़ापुर, सोनभद्र और भदोही ज़िलों के इतिहास, भूगोल, कला और संस्कृति के विषय में शोध-कार्य करनेवाले अध्येता आज भी 'मिर्ज़ापुर गज़ेटियर' की शरण में ही जाते हैं, किन्तु सन् 1987 वाले संस्करण से उन्हें निराशा ही होती है। वर्तमान में 'मिर्ज़ापुर गज़ेटियर' के सम्पादन और प्रकाशन का कार्य अत्यन्त श्रमसाध्य, समयसाध्य एवं व्ययसाध्य है, तथापि आयुक्त योगेश्वरराम मिश्र की दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण इस महार्घ कार्य का शुभारम्भ हो सका। 

बैठक के अन्त में प्रभाश्री ग्रामोदय सेवा आश्रम देवगढ़ की 'विद्वत्-सौष्ठव-पूजन' परम्परा के अन्तर्गत आयुक्त योगेश्वरराम मिश्र को अंगवस्त्रम् एवं भगवान् उमामहेश्वर का श्रीविग्रह देकर सम्मानित किया गया। वस्तुतः मिश्र जी को पितृ-परम्परा से विद्या-वैभव का वरदान प्राप्त है। इनके पितामह पण्डित रामचन्द्र मिश्र एवं पिता पण्डित जीवनराम मिश्र अपने समय के नदीष्ण विद्वान् थे। इनके ताऊ डॉ. जयराम मिश्र बालब्रह्मचारी थे। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से डी.लिट्. की गुरुतर उपाधि प्राप्त करने के साथ ही सन्त-साहित्य पर अनेक महनीय पुस्तकों का प्रणयन किया है। मिश्र जी का घर विद्वानों और प्रशासकों का संगम रहा है। इनकी शिक्षा-दीक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से सम्पन्न हुई है। विज्ञान वर्ग के विद्यार्थी होते हुए भी इन्होंने भाषाविज्ञान में विशेष दक्षता प्राप्त की है। थोड़े ही अन्तराल में क्रमशः पी.सी.एस. और आई.ए.एस. की परीक्षा उत्तीर्ण करके शासकीय सेवा में आने के बाद भी इन्होंने भारतीय और विदेशी विश्वविद्यालयों से अनेक उपाधियाँ अर्जित की है। श्री मिश्र ने जहाँ एक ओर अयोध्या और वाराणसी जैसे पौराणिक जनपदों के ज़िलाधिकारी के रूप में अनेक कीर्तिमान स्थापित किये हैं, वहीं अपनी विद्याव्यसनी परम्परा को सदैव जीवन्त रखा है। सम्प्रति इनके जैसे सहृदय, सृजनधर्मी और क्रियाशील प्रशासक के सुयोग से विन्ध्यक्षेत्र सँवर रहा है।

आयुक्त श्री मिश्र का विन्ध्याचल मण्डल से आत्मीय लगाव है। स्वयं इनके बड़े भाई प्रज्ञानराम मिश्र विन्ध्याचल मण्डल के 19वें कमिश्नर रहे हैं। इनके मामा डॉ. परमानन्द मिश्र ने ही 'मिर्ज़ापुर गज़ेटियर' के स्वातन्त्र्योत्तर संस्करण का सन् 1988 ई. में सम्पादन किया था। इसलिए इनकी हार्दिक इच्छा है कि 'मिर्ज़ापुर गज़ेटियर' के सम्पादन और प्रकाशन का कार्य नये सिरे से सम्पन्न हो।

पुराना मिर्ज़ापुर जनपद ही आज तीन जनपदों - मिर्ज़ापुर, सोनभद्र और भदोही - में विभक्त है। यहाँ यह उल्लेखनीय है डॉ. जितेन्द्रकुमार सिंह 'संजय' ने सन् 2015 ई. में ही 'सोनभद्र का इतिहास' लिख दिया था, जिसे सन् 2016 ई. में उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ के द्वारा 'आचार्य नरेन्द्रदेव नामित पुरस्कार' भी मिल चुका है। उपर्युक्त सूची में 'मिर्ज़ापुर का इतिहास' और 'भदोही का इतिहास' लिखना शेष है। 

'विन्ध्याचल ओरिएंटल सीरीज़' के प्रधान सम्पादक की हैसियत से आयुक्त योगेश्वरराम मिश्र ने डॉ. जितेन्द्रकुमार सिंह 'संजय' को 'मिर्ज़ापुर गज़ेटियर' के सम्पादन-प्रकाशन का दायित्व प्रदान किया। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि गज़ेटियर के इस संस्करण में सर डी. एल. ड्रैक-ब्रॉकमैन के द्वारा सम्पादित संस्करण को यथावत् प्रकाशित किया जायेगा। इसके अतिरिक्त परिशिष्ट के अन्तर्गत 'इम्पीरियल गजेटियर ऑफ़ इण्डिया' एवं 'ए हैण्ड-बुक ऑफ़ द इंग्लिश प्रि-म्यूटिनी रिकार्ड्स इन द गवर्नमेण्ट रिकार्ड्स रूम्स ऑफ़ युनाइटेड प्राविंसेस ऑफ़ आगरा एण्ड अवध' के मिर्ज़ापुर से सम्बन्धित अंश भी यथावत् प्रकाशित करने की योजना है। इस अवसर पर आश्रम की उपसचिव श्रीमती पद्मिनी श्वेता सिंह, ज्ञानेन्द्रकुमार सिंह 'बृजेश', कीर्तिवर्धन सिंह एवं आर्या भव्यानी सिंह की उपस्थिति रही। यह खबर मिलते ही सोनभद्र निवासी और मेघालय में रहकर हिंदी भाषा में लेखन से संलग्न डॉ अवधेश कुमार अवध ने हार्दिक प्रसन्नता व्यक्त की।