महिला काव्य मंच की गोष्ठी में गरजी ऋतु गोयल -जब पुकारती है सरहदे

डॉ शम्भू पंवार, नई दिल्ली। कारगिल विजय दिवस पर महिला काव्य मंच द्वारा ऑनलाइन काव्य गोष्ठी महिला काव्य मंच की राष्ट्रीय महासचिव नीतू सिंह राय के संयोजन में हुई। गोष्ठी की अध्यक्षता मंच के संस्थापक नरेश नाज व संचालन कवयित्री ममता किरण और नीतू सिंह राय ने किया।

               गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि उत्तरी दिल्ली की उप महापौर एवं कवयित्री ऋतु गोयल ने कहा-

ऐसा नहीं कि खुशबुएं फिजाएं उन्हें अच्छी नहीं लगती

ऐसा भी नहीं कि जुल्फ़ों की घटायें उन्हें अच्छी नहीं लगती

पर जब जब पुकारती हैं सरहदें उन्हें महफ़ूज़ रखने को

तब तब घर की आबो हवाएं उन्हें अच्छी नहीं लगती 

कवयित्री अनिता चंद ने अपनी रचना यूं पेश की-

क़लम आँसुओं में डूबती है मेरी

जब चूड़ियों के टूटने से बिखरती है ज़िन्दगी तेरी


सौम्या दुआ ने कहा-

सलाम उन वीरों को

जो रिश्तों से नाता तोड़ गये

एक धरती मॉ की खातिर

मिट्टी से नाता जोड़ गये। 

डॉ वीनिता मेहता ने फौजियों के परिजनों के दर्द को कुछ इस तरह पेश किया -

माँ दरवाजा खोल तेरा बेटा घर आया है

खाली हाथ नही तिरंगा पहन कर आया है। 

शायरा ऊर्वशी अग्रवाल 'उर्वी' ने कहा-

देखा ये गया अक्सर कुछ ऊंची उड़ानों से

पानी भी निकलता है पत्थर की चट्टानों से

अंतरराष्ट्रीय कवयित्री अंजू जैन ने कुछ इस तरह से लोगों का आह्वान किया-

आज फिर भारती मॉ

तुमको पुकारती मॉ

उठो उठो अब सुख नींद छोड़ दीजिये


अंतरराष्ट्रीय कवयित्री ममता किरण ने फौजियों के ज़ज़्बे को पेश करते हुए कहा-

हम रक्षक है सरहद के फौलादी सीना रखते

 है काम यही बस अपना दुश्मन को धूल चटाना

कवयित्री नीतू सिंह राय ने शहीदों को इस तरह सम्मानित किया-

जो मर मिटते हैं मातृ भूमि पर अपना फर्ज़ निभाने को

कहते नहीं हैं जाना इस तरह से इनके जाने को।

गोष्ठी के अध्यक्ष नरेश नाज़ ने कहा-

अब लगे ना यहाँ मेरा दिल

आ चले कारगिल- कारगिल

दुश्मन मारे जायेगें सारे आखिरकार

जाग रहा है देश में घर घर चौकीदार 

कारगिल विजय दिवस पर आयोजित यह कवयित्री सम्मेलन में सभी ने कारगिल में शहीद हुवे जवानों को स्मर्ण करते हुवे अपनी काव्यात्मक वाणी से पुष्पांजलि अर्पित की।